हुर्रियत कॉंफ्रेंस के नरमपंथी गुट ने कहा है कि वह भारत सरकार के साथ अपनी बातचीत में पाकिस्तान को अपनी इच्छा थोपने की अनुमति नहीं देगा.
अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के नेताओं और भारतीय उपप्रधानमंत्री एल के आडवाणी के बीच ये बातचीत 22 जनवरी को दिल्ली में होनी है.
मौलवी अब्बास अंसारी के नेतृत्व वाले हुर्रियत गुट से पाँच नेता दिल्ली आ रहे हैं.
गुरूवार को श्रीनगर में हुर्रियत की एक बैठक में पाँच सदस्यों वाली ये टीम बनाई गई.
मौलवी अब्बास अंसारी के अलावा मीरवाइज़ उमर फ़ारूख़, अब्दुल गनी बट, बिलाल लोन और फ़ज़ल हक़ क़ुरैशी दिल्ली जाएँगे.
पाकिस्तान और चरमपंथी
हुर्रियत की बैठक के बाद वरिष्ठ नेता अब्दुल गनी बट ने बीबीसी से कहा कि हुर्रियत भारत और पाकिस्तान दोनों से बात करना चाहता है.
लेकिन उन्होंने कहा,"हम पाकिस्तान को अपनी इच्छा लादने की अनुमति नहीं देंगे".
उन्होंने ये भी कहा कि वे और उनके सहयोगी चरमपंथियों की धमकियों से भयभीत नहीं हैं.
उन्होंने कहा,"चरमपंथी कभी-कभी जज़्बाती हो जाते हैं मगर एक बार वे समझ जाएँ तो फिर वे ये मान लेंगे कि संकट सुलझाने के लिए बातचीत ज़रूरी है".
अब्दुल गनी बट ने कहा कि हुर्रियत नेता पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर जाकर वहाँ चरमपंथियों को बातचीत के लिए समझाना चाहते हैं.
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के साथ बातचीत में इस मुद्दे को उठाया जाएगा.
समर्थन
अब्दुल गनी बट ने कहा कि भारत सरकार के साथ बातचीत के उनके गुट के फ़ैसले को कश्मीर की जनता का समर्थन मिला हुआ है.
इस बीच हुर्रियत ने कश्मीर के दो अन्य संगठनों, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट और जमाते इस्लामी को अपनी बैठक के लिए आमंत्रित किया था मगर वे नहीं आए.
जमाते इस्लामी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि भारत सरकार के साथ बातचीत करनेवाला कोई भी गुट केवल अपनी बात कहेगा ना कि कश्मीर के लोगों की.