असम में जोरहाट के ज़िला मुख्यालय से महज़ 25 किलोमीटर दूर दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली धीर-धीरे ब्रह्मपुत्र के पेट में समा रहा है.
यहाँ के 155 गाँवों में रहने वाले लगभग डेढ़ लाख लोग हर रोज़ नदी की धार पर नज़र टिकाए रहते हैं.
हर साल बरसात के मौसम में पूरा द्वीप कमर तक पानी में डूब जाता है और बाहरी दुनिया से इसका संपर्क पूरी तरह टूट जाता है.
उस समय यहाँ के टेलीफ़ोन भी काम करना बंद कर देते हैं.
ब्रह्मपुत्र का तेज बहाव हर साल द्वीप का एक बड़ा हिस्सा अपने साथ बहा ले जाता है. पिछले साल बाढ़ के दौरान द्वीप के दो गाँव नदी में समा गए थे.
सांस्कृतिक केंद्र
कामकाज की सहूलियत के लिए माजुली को सब डिवीज़न का दर्जा दिया गया था. तब इसका क्षेत्रफल 1278 वर्ग किलोमीटर था जो अब घटकर 800 वर्ग किलोमीटर रह गया है.
माजुली द्वीप पिछली पाँच सदियों से असम का सांस्कृतिक केंद्र रहा है जिसे बचाने के लिए विभिन्न संगठन प्रयास कर रहे हैं.
एक ग़ैरसरकारी संगठन माजुली द्वीप सुरक्षा और विकास परिषद ने केंद्र सरकार से इस द्वीप को यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल करने की माँग की है.
परिषद के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य डॉक्टर अरूण शर्मा की अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात कर माजुली को बचाने के लिए तत्काल क़दम उठाने की माँग की थी.
वाजपेयी ने जल्दी ही माजुली का दौरा करने का भरोसा दिलाया है.
विविधता
यह द्वीप अपने वैष्णव नृत्यों के अलावा रास उत्सव, टेराकोटा और पर्यटन के लिए मशहूर है.
यहाँ फूलों और वनस्पतियों की कई दुर्लभ क़िस्में भी पाई जाती हैं जो कहीं और नहीं दिखतीं.
विभिन्न जनजातियों की मिलीजुली आबादी वाले माजुली को छोटा असम कहा जाता है.
खेती ही लोगों की रोज़ी-रोटी का प्रमुख ज़रिया है. यहाँ छह कॉलेजों के अलावा कम से कम 500 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय हैं.
प्राचीन काल की तरह गुरुकुल में रहकर गुरू के आधीन शिक्षा हासिल करने की परंपरा भी अभी जारी है.
वैष्णव पूजा स्थलों को सत्र कहा जाता है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ईमानदारों का घर.
माजुली को सत्रों की भूमि कहा जाता है. असम में फैले 600 सत्रों में से 65 यहीं थे.
भारत में ब्रिटेन के तत्कालीन वॉयसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने 1920 में अपनी एक रिपोर्ट में सत्रों और सत्राधिकारियों की सामाजिक भूमिका की सराहना की थी.
बदलाव
समय गुज़रने के साथ-साथ इस द्वीप की जीवन शैली भी प्रभावित हुई है. एक बुज़ुर्ग कनक दत्ता कहते हैं कि यहाँ अब सामाजिक और नैतिक मूल्यों का विघटन हो रहा है.
पहले पूरा द्वीप एक परिवार की तरह था लेकिन अब यह बिखर रहा है.
वैसे सत्रों की सामाजिक भूमिका अब भी प्रासंगिक है. हाल में जब यहाँ शराब की दुकानों के लाइसेंस देने का एक प्रस्ताव आया तो सबने मिलकर इसका कड़ा विरोध किया.
नतीजा ये हुआ कि वह प्रस्ताव तुरंत ख़ारिज हो गया.
जोरहाट से तीन बार बस बदलने और दो बार नाव की सवारी के बाद ही माजुली तक पहुँचा जा सकता है.
जिस माजुली को दुनिया के सबसे आकर्षक पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किया जा सकता था वह राज्य सरकारों की लापरवाही की वजह से अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है.
अरूण शर्मा कहते हैं कि माजुली को अब भी बचाया जा सकता है बशर्ते कि सरकार वैज्ञानिक आधार पर कोई ठोस योजना तैयार करके उस पर ईमानदारी से अमल करे.
राज्य सरकार ने इसके लिए 75 करोड़ रूपए की एक प्राथमिक योजना बनाकर केंद्र सरकार को भेजी भी है.
माजुली के बारे में एक मज़ेदार बात ये है कि यहाँ जितनी नावें हैं उतनी शायद इटली के वेनिस शहर में भी नहीं होंगी.