प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रविवार को हैदराबाद में हुई रैली में संसदीय चुनाव का नाम न लेते हुए भी एक तरह से अपनी रणनीति का ही ऐलान कर दिया.
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मौक़े पर आयोजित इस रैली में अपने भाषण में उन्होंने अपनी सरकार की आर्थिक उपलब्धियाँ गिनाईं और कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर जम कर प्रहार किए.
उनका कहना था, सोनिया गाँधी ने कहा था कि हमारे स्वप्न कभी पूरे नहीं होंगे. हम ने उन्हें दिखा दिया कि हम अगर स्वप्न देखते हैं तो उन्हें साकार करना भी जानते हैं.
उन्होंने कॉंग्रेस अध्यक्ष को उन राजनीतिक दलों के साथ चुनावी तालमेल बिठाने के प्रयास का दोषी ठहराया जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या की साज़िश रची थी.
अपने भाषण में उन्होंने भारत-पाकिस्तान संबंधों का भी खुल कर ज़िक्र किया.
उन्होंने विश्वास ज़ाहिर किया कि पाकिस्तान के साथ युद्धविराम समझौते पर अमल होता रहेगा और सीमापार से घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
उनका कहना था कि भारत अपने सभी पड़ोसियों के साथ व्यापार और मैत्री संबंध चाहता है.
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पाकिस्तान के साथ संबंधों, शांति के फ़ायदों और भारत के आर्थिक विकास जैसे मुद्दों की चर्चा की.
हैदराबाद में बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूक़ का कहना है कि उनका भाषण इस बात का स्पष्ट संकेत था कि भाजपा लोकसभा चुनाव में अपने अभियान को किन बातों पर केंद्रित रखेगी.
पार्टी के महासचिव मुख़्तार अब्बास नक़वी ने इसे एक 'रचनात्मक अभियान' कहा.
रैली में लगभग पाँच लाख लोग जमा थे.
हाल ही में इस्लामाबाद में सार्क के दौरान हुए मुक्त व्यापार समझौते का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के देश क्षेत्रीय गुट बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं.
कोशिश जारी रही
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में लगातार आए उतार-चढ़ाव का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बस की कूटनीति और आगरा शिखर सम्मेलन की विफलता के बावजूद उन्होंने प्रयास नहीं छोड़े थे.
उन्होंने कहा कि वह जब से प्रधानमंत्री बने हैं, उन्होंने पाकिस्तान की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है.
और, उनका कहना था कि चाहे देर से ही सही, पाकिस्तान ने अब उनका हाथ थामा है.
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और उसे अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए मिसाल क़ायम करनी चाहिए.