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आतंकवाद रोकने और सहयोग पर सहमति

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए कई क़दम उठाने पर सहमति हुई है.

पाकिस्तान में 12वें सार्क सम्मेलन के आख़िरी दिन इस्लामाबाद घोषणापत्र पर हस्ताक्षर हुए.

इस घोषणापत्र में आतंकवाद के साथ-साथ आर्थिक सहयोग और ग़रीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर भी सहमति हुई.

इस दस्तावेज़ पर सार्क देशों के विदेश मंत्रियों ने अपने-अपने राष्ट्राध्यक्षों के सामने दस्तख़त किए.

आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए एक विशेष संधि पर भी हस्ताक्षर किए गए.

इस संधि में इस बात का ज़िक्र है कि सार्क क्षेत्र से आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए सभी मिल कर काम करेंगे.

इसमें आतंकवादियों के वित्तीय नेटवर्क को ख़त्म करने की भी वकालत की गई है.

दरअसल 1987 में ही आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए सार्क का सम्मेलन हुआ था और उसके आधार पर ही घोषणापत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर विशेष प्रावधान बनाया गया.

इस बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ज़फ़रुल्ला ख़ान जमाली ने कहा कि इससे साबित होता है कि सार्क के देश किसी भी रूप में आतंकवाद का ख़ात्मा चाहते हैं.

प्रधानमंत्री जमाली ने आतंकवाद पर संधि को 'ऐतिहासिक' बताया.

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान इस संधि को लागू करने के लिए अपनी ओर से हरसंभव कोशिश करेगा."

आर्थिक मुद्दे

आतंकवाद के अलावा आर्थिक मुद्दों पर सहमति सार्क सम्मेलन की विशेष उपलब्धि रही.

इस्लामाबाद घोषणापत्र में आर्थिक मोर्चे पर क्षेत्रीय सहयोग को सबसे ज़्यादा महत्व दिया गया.

मुक्त व्यापार क्षेत्र पर तो पहले ही सदस्य देशों में सहमति हो चुकी है और तय यह हुआ है कि 1 जनवरी 2006 से यह लागू हो जाएगा.

जमाली ने दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र यानी साफ़्टा पर सहमति को एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि इससे क्षेत्रीय सहयोग को एक नई दिशा मिलेगी.

इस घोषणापत्र में दक्षिण एशियाई आर्थिक संघ बनाने की भी बात कही गई है. ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को भी महत्व दिया गया है.

इसके साथ-साथ परिवहन और पर्यटन के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग पर बल दिया गया है.

इस्लामाबाद घोषणापत्र में ग़रीबी उन्मूलन पर योजना को मंज़ूरी दे दी गई है. साथ में सोशल चॉर्टर के अंतर्गत आबादी नियंत्रण, स्वास्थ्य पर भी ख़ास ध्यान दिया गया है.

श्रीलंका के कैंडी शहर में बने सांस्कृतिक केंद्र को और समृद्ध बनाने की भी बात कही गई है.