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भारत-पाक वार्ता फ़रवरी में

इस्लामाबाद में हुए 12वें सार्क शिखर सम्मेलन के बाद भारत और पाकिस्तान ने एक साझा बयान में घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच फ़रवरी से व्यापक बातचीत होगी.

इस्लामाबाद में भारत के विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारत को यह आश्वासन दिया है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा.

दोनो देशों के साझा बयान में स्पष्ट कहा गया है कि बातचीत में कश्मीर का मुद्दा भी शामिल होगा.

यशवंत सिन्हा ने संकेत दिया कि बातचीत सचिव स्तर की होगी और 1997 में बातचीत जहाँ रुक गई थी वहाँ से आगे बढ़ेगी.

उन्होंने कहा कि बातचीत के बारे में और ब्यौरा बाद में दिया जाएगा.

भारत हमेशा कहता रहा है कि सीमा पार आतंकवाद ख़त्म होने से पहले वह पाकिस्तान से बात नहीं करेगा, क्या यह स्थिति बदली है?

इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि ज़मीनी स्थिति और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के आश्वासन के बाद ही बातचीत शुरू करने का फ़ैसला किया गया है.

साझा बयान

साझा बयान में कहा गया है कि सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ मिले.

दोनों नेताओं ने इस पर ख़ुशी ज़ाहिर की कि रिश्तों को सामान्य करने के लिए उठाए जा रहे क़दम सही दिशा में जा रहे हैं.

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि हिंसा की घटनाओं पर रोक लगानी होगी जिस पर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया है.

इसके बाद दोनों नेताओं के बीच सहमति हुई कि व्यापाक बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाए जिससे दोनों देशों के बीच कश्मीर सहित दूसरे मामलों पर शांतिपूर्ण समझौता हो सके.

साझा बयान में शांतिपूर्ण समझौते की बात के साथ-साथ यह भी स्पष्ट किया गया है कि समझौता ऐसा हो जो दोनों पक्षों को मंज़ूर हो.

बयान में यह भी कहा गया है कि शांति, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग से दोनो देशों की जनता को लाभ होगा.

इनकार

इस प्रेस काँफ़्रेंस में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र भी मौजूद थे.

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनकी पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के महानिदेशक से कोई बातचीत हुई है.

लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने पाकिस्तान में कई मोर्चे से बातचीत की लेकिन उन्होंने इस बारे में ज़्यादा विवरण देने से मना कर दिया.

ब्रजेश मिश्र ने कहा कि इस साझा बयान से यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि किसी की हार हुई है किसी की जीत.

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य शांति स्थापित करना है.