अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी शहर कंधार में एक बम धमाके में कम से कम 13 लोगों की जानें चलीं गईं हैं.
इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने चेतावनी दी है कि सुरक्षा से संबंधित समस्याओं के कारण अफ़ग़ानिस्तान के राजनीतिक पुनर्निर्माण को ख़तरा पैदा हो गया है.
सुरक्षा परिषद को दी एक रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया एक नाज़ुक दौर में है.
उन्होंने अपील की कि अफ़ग़ानिस्तान में पुनर्निर्माण के लिए धन देने वाले देशों का एक और सम्मेलन होना चाहिए.
उधर कंधार में फ़ौज के एक प्रवक्ता जनरल अब्दुल वसी ने बताया, "मरने वालों में से अधिकतर अफ़ग़ानी महिलाएँ और बच्चे थे."
हाल के दिनों में अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी इलाक़े में हिंसा की वारदातें काफ़ी बढ़ गईं हैं.
माना जा रहा है कि इसमें तालेबान समर्थकों का हाथ है.
मौजूदा धमाके के तहत वहाँ बीस मिनट के अंतराल में दो धमाके हुए.
प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार ये धमाका एक सेना छावनी के सामने हुआ.
वहाँ मौजूद बीबीसी संवाददाता क्रिस्पिन थोरोल्ड ने बताया कि अमरीकी अधिकारियों ने पूरे इलाक़े को सील कर दिया है.
तालेबान की धरती
उल्लेखनीय है कि कंधार तालेबान के प्रभाव वाला इलाक़ा है.
2001 में अमरीका के नेतृत्व वाले हमलों से पहले तक तालेबान का अफ़ग़ानिस्तान पर राज था.
इस हमले की ज़िम्मेदारी तालेबान के ही समर्थकों को दी जा रही है.
हाल के महीनों में वहाँ अपहरण और बमों से हमले की कई घटनाएँ सामने आईं हैं.
इनमें से अधिकतर हमले दक्षिण-पूर्व अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों के ठिकानों पर हुए.
नवंबर 2003 में कंधार में संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय के सामने एक कार बम धमाके में एक अफ़ग़ान घायल हो गया था.
तालेबान आंदोलन के एक प्रवक्ता के अनुसार उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद राहतकर्मियों और सैनिकों के ख़िलाफ़ जेहाद छेड़ा है.