भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा है कि वे पाकिस्तान के नेताओं के साथ कश्मीर मुद्दे पर बातचीत करने को तैयार हैं.
लेकिन उनका ये भी कहना है कि भारत-पाकिस्तान की आपसी मुद्दों पर बातचीत दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की शिखर बैठक के दौरान नहीं होगी.
प्रधानमंत्री वाजपेयी ने ये स्पष्ट नहीं किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी मुद्दों पर बातचीत कब शुरु होगी.
प्रधानमंत्री वाजपेयी ने ये विचार पाकिस्तान टेलीविज़न और भारतीय टेलीविज़न चैनल दूरदर्शन को दिए अलग-अलग इंटरव्यू में व्यक्त किए हैं.
वे दक्षिण एशियाई देशों की तीन दिवसीय शिखर बैठक के लिए शनिवार को इस्लामाबाद पहुँचे.
भारतीय प्रधानमंत्री 1999 के बाद पहली बार पाकिस्तान गए हैं.
मुशर्रफ़ से बातचीत
प्रधानमंत्री वाजपेयी का कहना था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ऐसे नेता हैं जिनसे इस मुद्दे पर बात हो सकती है.
उन्होंने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से बात करने कोई आपत्ति नहीं है चाहे कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान अलग-अलग राय रखते हैं.
उनका कहना था, "ये हमारा दावा है और बिलकुल जायज़ दावा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है लेकिन हम इस विषय पर बातचीत के लिए तैयार हैं."
उनका कहना था कि कश्मीर मुद्दे पर बैठकर पूरी तरह से बातचीत नहीं हुई है और पाकिस्तान और भारत केवल इस बारे में अपनी-अपनी बात दोहराते आए हैं.
उन्होंने कहा कि कश्मीर ऐसा मुद्दा है जिसे सुलझाने में समय लग सकता है.
'मील का पत्थर'
इस्लामबाद रवाना होने से पहले वाजपेयी ने दूरदर्शन से बातचीत में कहा कि सार्क में आर्थिक मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिए और यदि ये सफल होती है तो अन्य मुद्दों को सुलझाने में भी मदद मिलेगी.
उनका ये भी कहना था कि यदि भारत और पाकिस्तान क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर आगे बढ़ें तो सार्क शिखर सम्मेलन दोनों देशों के रिश्ते में मील का पत्थर साबित होगा.
दूरदर्शन के साथ इंटरव्यू में, सार्क के दौरान द्विपक्षीय बातचीत से साफ़ इनकार करते हुए उन्होंने कहा, "यदि हम आर्थिक मुद्दों से अलग हटे तो भ्रम की स्थिति बनेगी और गतिरोध बनेगा."
सार्क की शिखर बैठक के दौरान मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित करने और आतंकवाद का सामना करने के विषय में समझौते होने हैं.
पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति पैदा होती रही है.
जनवरी 2001 की काठमांडू शिखर बैठक में वाजपेयी और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ सिर्फ हाथ भर मिला पाए थे.