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नरसिंहराव लखूभाई मामले में भी बरी

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव क़रीब 50 लाख रूपए के लखूभाई पाठक धोखाधड़ी मामले में बरी हो गए हैं.

इस मामले में शामिल विवादास्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी और उनके निकट सहयोगी एनके अग्रवाल उर्फ मामाजी भी बरी हो गए हैं.

ग़ौरतलब है कि सीबीआई ने निरसिंहराव पर ब्रितानी उद्योगपति लखूभाई पाठक को भारत में न्यूज़प्रिंट और अख़बारों के काग़ज बनाने वाली अन्य सामग्रियों के ठेके देने के बदले क़रीब एक लाख अमरीकी डॉलर लेने का आरोप लगाया था.

1993 से ये मामला दिल्ली की एक अदालत में चल रहा था.

विशेष न्यायाधिश दिनेश दयाल ने लखूभाई पाठक के सभी सबूतों को अविश्वसनीय बताते हुए सभी अभियुक्तों को रिहा कर दिया.

अदालत के इस फ़ैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री बहुत ख़ुश थे हालाँकि उन्होंने इसके बाद राजनीति से जुड़ी कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

उनके वकील कपिल सिब्बल ने जानकारी दी, "श्री नरसिंहराव ने मुझे बताया है कि वे पिछले आठ साल से इस पल का इंतज़ार कर रहे थे."

सिब्बल ने ये भी कहा कि हमारे देश के हर नागरिक को इससे ख़ुश होना चाहिए कि हमारे प्रधानमंत्रियों को भ्रष्टाचार से कोई मतलब नहीं है.

ग़ौरतलब है कि नरसिंहराव पर इससे पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा रिश्वतखोरी कांड और सेंट किट्स धोखाधड़ी मामले में भी आरोप लगे थे जिनमें वह पहले ही बरी हो चुके हैं.