तमिलनाडु की एक प्रमुख पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम ( डीएमके) के दो मंत्रियों टी आर बालू और स्वास्थ्य राज्यमंत्री ए राजा ने रविवार को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को इस्तीफ़े सौंप दिए.
इसके पहले शनिवार को डीएमके की एक उच्चस्तरीय बैठक में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार से नाता तोड़ने का फ़ैसला किया था.
साथ ही पार्टी ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से भी अलग होने का फ़ैसला किया था.
हालाँकि पार्टी ने केंद्र सरकार को मुद्दों के आधार पर बाहर से समर्थन जारी रखने का निर्णय किया है.
डीएमके के लोक सभा में 11 सदस्य हैं.
शनिवार को उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ये डीएमके का फ़ैसला है लेकिन मंत्रियों को हटा लेने से सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
बिगड़ते रिश्ते
प्रेक्षकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से भारतीय जनता पार्टी और डीएमके के रिश्तों में तनाव चल रहा था.
उल्लेखनीय है कि जून, 2001 में करुणानिधि को राज्य सरकार ने गिरफ़्तार कर लिया था.
हालांकि केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप तो किया लेकिन माना जाता है कि करुणानिधि इससे संतुष्ट नहीं थे.
जानकारों का कहना है कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की भारतीय जनता पार्टी के साथ बढ़ती नज़दीकियों को लेकर भी डीएमके के नेता नाराज़ थे.
उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर भी अपना विरोध व्यक्त किया था.
राज्य के कुछ नेताओं के ख़िलाफ़ 'पोटा' लगाए जाने को लेकर भी डीएमके नेता केंद्र सरकार की कार्रवाई से ख़ुश नहीं बताए जाते हैं.