कश्मीर पर 'जनमत संग्रह करवाने की माँग छोड़ने' संबंधी पाकिस्तान के प्रस्ताव पर भारत ने सकारात्मक रुख़ दिखाया है.
भारतीय विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान के नज़रिए में किसी भी बदलाव को स्वीकार करने के लिए हमेशा ही तैयार रहेगी.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की ओर से गुरुवार को रखे गए प्रस्ताव पर भारत की यह पहली प्रतिक्रिया है.
पाकिस्तान लंबे समय से कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का मसला बने कश्मीर के बारे में जनमत संग्रह करवाया जाना चाहिए.
पाकिस्तानी राष्ट्रपति के अस्पष्ट से प्रस्ताव पर भारतीय कैबिनेट की शुक्रवार को बैठक हुई जिसकी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अध्यक्षता की.
विदेश मंत्री सिन्हा ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "पाकिस्तान की स्थिति में यदि कोई बदलाव होता है तो भारत इसका स्वागत करने के लिए हमेशा ही तैयार रहेगा."
उन्होंने कहा, "हमने हमेशा ही लचीला रुख़ अपनाने की बात कही है. ये तो पाकिस्तान ही अड़ियल रवैया अपनाए था."
इससे पहले अमरीका और संयुक्त राष्ट्र दोनों ने ही पाकिस्तान के इस रवैये की सराहना की थी.
मगर पाकिस्तान के कट्टरपंथियों का इस बारे में कहना है कि ये 'कश्मीरियों के साथ धोख़ा' है.
भारत अब तक कहता रहा है कि कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार जनमत संग्रह करवाने की बात अब वैध नहीं रही है.
इसके अलावा भारतीय प्रधानमंत्री वाजपेयी अगले महीने की शुरुआत में ही इस्लामाबाद जाने वाले हैं.
वहाँ वह दक्षेस की शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे.