भूटान के सैनिकों के साथ हुई गोलीबारी में भारत के अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) के संस्थापक नेता भीमकांतो बरगोहांई की मौत हो गई है.
सत्तर वर्षीय भीमकांतो बरगोहांई ने 1979 में असम में उल्फ़ा का गठन किया था.
बरगोहांई गुरुवार को बुरी तरह घायल हो गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई.
उल्लेखनीय है कि भूटान की सेना ने सोमवार से तीन भारतीय अलगाववादी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरु की है.
ये संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम, नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड और कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन हैं.
इस कार्रवाई में अब तक 130 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और सेना ने दो सौ से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया है.
इसके अलावा भूटान सरकार उन व्यापारियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने जा रही है जो कथित तौर पर इन विद्रोहियों की मदद करते रहे हैं.
ये व्यापारी भी ज़्यादातर भारतीय ही हैं.
भूटान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता येशे दोरजी का कहना है कि इन व्यापारियों के ख़िलाफ़ भी भूटान के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1992 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी.
उनकी इस घोषणा के बाद व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकांश लोग असम लौटने की तैयारी कर रहे हैं.
भारत के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए ये संगठन भूटान से ही कार्रवाइयों का संचालन करते रहे हैं.
इन विद्रोही संगठनों ने भूटान सरकार को प्रस्ताव रखा था कि यदि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई रोक दी जाए तो वे भूटान छोड़ देंगे.
उधर भारतीय ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई शुरु होने के बाद बहुत से अलगाववादी नेता और उनके रिश्तेदार आत्मसमर्पण कर चुके हैं.
अधिकारियों का कहना है कि उल्फ़ा के बहुत से कार्यकर्ता भारत भूटान सीमा के जंगलों में घुस गए हैं और वे भारत और बंगला देश में प्रवेश की कोशिश कर रहे हैं.
भारत को सौंपना शुरु
इस कार्रवाई के बाद भूटान ने स्पष्ट कर दिया था कि वह बाद में इन अलगाववादी नेताओं को भारत को सौंप देगा.
भारतीय सेना प्रमुख जनरल एनसी विज का कहना है कि भूटान ने विद्रोहियों को भारत को सौंपने की कार्रवाई शुरु कर दी है और अब तक सात नेताओं को भारत को सौंपा जा चुका है.
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए जनरल विज ने कहा कि संभावना है कि आने वाले दिनों में भूटान और विद्रोही नेताओं को सौंपेगा.
उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा बल भूटान से लगी सीमा पर कड़ी निगरानी रखे हुए है जिससे इन विद्रोहियों को भारतीय सीमा में प्रवेश से रोका जा सके.