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गिलानी की रिहाई को चुनौती

भारत में दो साल पहले 13 दिसंबर के दिन संसद पर हुए चरमपंथी हमले के दौरान मारे गए सुरक्षाकर्मियों को शनिवार को श्रद्धांजलि दी जा रही है.

दिल्ली में उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, राज्यसभा की उपाध्यक्ष नजमा हेपतुल्ला और संसदीय कार्य मंत्री सुषमा स्वराज ने मारे गए सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी.

इस दौरान कई सांसद और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.

13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए चरमपंथी हमले में एक महिला सहित नौ सुरक्षाकर्मी मारे गए थे.

लेकिन चरमपंथी संसद भवन के अंदर नहीं घुस पाए. चरमपंथी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते काफ़ी ख़राब हो गए थे और दोनों देश एक और युद्ध के क़रीब आ गए थे.

भारत ने अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया था और रेल, सड़क और वायु संपर्क भी ख़त्म कर दिया था.

उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने संसद भवन में आयोजित रक्तदान शिविर का भी दौरा किया.

कई सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों ने रक्तदान किया.

फ़ैसले को चुनौती

दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने संसद पर हुए चरमपंथी हमले के सिलसिले में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसएआर गिलानी और अफ़सां गुरु को बरी कर दिया गया था.

गिलानी को निचली अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी. गिलानी पर संसद पर हुए हमले की साज़िश रचने में मदद करने का आरोप लगाया गया था.

लेकिन 29 अक्तूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने गिलानी और अफसां गुरू को बरी करने का आदेश सुनाया था.

अदालत ने मोहम्मद अफ़ज़ल और शौकत हुसैन गुरू को मौत की सज़ा के निचली अदालत के फ़ैसले को बहाल रखा था.

दिल्ली पुलिस ने अपनी याचिका में कहा है कि हाई कोर्ट के पास गिलानी और अफसां गुरू के साज़िश में शामिल होने के सबूत पेश किए गए थे, लेकिन अदालत ने उस पर गौर नहीं किया.