पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए दोनों देशों में लोकतांत्रिक सरकारों का होना ज़रूरी है.
नई दिल्ली में अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में बेनज़ीर भुट्टो ने द्विपक्षीय संबंध सुधारने की दिशा में भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वापजेयी की पहल का स्वागत किया.
अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री मैडलिन अलब्राइट के साथ-साथ इस सेमिनार में कई केंद्रीय मंत्री और कई देशों के राजनयिक हिस्सा ले रहे हैं.
अपने भाषण में बेनज़ीर भुट्टो ने कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम के फ़ैसले का स्वागत किया.
उन्होंने इसे भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आपसी विश्वास बढ़ाने के 12 सूत्री प्रस्ताव का नतीजा बताया.
अनिवार्य
बेनज़ीर ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों में तनाव कम करने के लिए लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी गई सरकार का होना अनिवार्य है.
उन्होंने कहा, "मेरा विश्वास है कि एक लोकतंत्र दूसरे लोकतंत्र पर हमला नहीं करता."
बेनज़ीर ने कहा कि वे भारत और पाकिस्तान के इतिहास के मद्देनज़र ऐसा कह रही हैं.
उन्होंने कहा, "आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तीन युद्ध हुए और ये तीनों ही युद्ध सेना के तानाशाह शासकों के ज़माने में हुए."
उन्होंने कहा कि 1996 में लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी गई उनकी सरकार को हटा दिए जाने के बाद से भारत और पाकिस्तान तीन बार युद्ध के क़रीब आ चुके हैं.
बेनज़ीर ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि बस डिप्लोमेसी और आगरा शिखर सम्मेलन की असफलता के बावजूद भारत ने धैर्य नहीं खोया है.
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर युद्ध विराम से लोगों को ख़ुशियाँ मिली हैं.
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों पर इराक़ में सेना भेजने का दबाव है.
बेनज़ीर ने कहा, "कितना अच्छा होता अगर दक्षिण एशिया के देश अंतिम फ़ैसला करने से पहले ऐसे महत्वपूर्ण मामलों पर आपस में सलाह कर लेते."
उन्होंने कहा कि भारत आकर दोनों देशों के रिश्ते पर बोलना काफ़ी पेचीदा था.
बेनज़ीर ने कहा कि उनके लिए यह फ़ैसला लेना आसान नहीं था.