पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों का कहना है कि वहाँ परमाणु प्रयोगशालाओं में काम करनेवाले दो वरिष्ठ वैज्ञानिकों को हिरासत में लिया गया है.
ये धरपकड़ पश्चिम देशों के इन आरोपों के बाद की गई मानी जा रही है जिसमें पाकिस्तान के वैज्ञानिकों पर परमाणु तकनीक ईरान को हस्तांतरित करने का आरोप है.
पाकिस्तानी अधिकारी इससे इनकार करते हैं और वे वैज्ञानिकों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि नहीं कर रहे हैं.
अख़बारों ने हिरासत में लिए वैज्ञानिकों के नाम डॉक्टर फ़ारूक मोहम्मद और डॉक्टर यासीन चौहान बताए हैं.
विपक्ष का कहना है कि इन दोनों वैज्ञानिकों ने 1998 में परमाणु विस्फोटों में प्रमुख भूमिका निभाई थी.
विपक्षी सदस्यों ने पाकिस्तानी संसद में कहा कि देश के प्रमुख परमाणु केंद्र कहूटा रिसर्च लेबोरेटरी से दो वैज्ञानिकों को अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफबीआई के कहने पर दो सप्ताह पहले हिरासत में लिया गया था.
सांसदों ने इसके विरोध में संसद का ये कहते हुए बहिष्कार किया कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा उत्पन्न हो सकता है.
प्रतिक्रिया
इसके बाद विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया था जिसमें कहा गया था कि ऐसे लोग जो संवेदनशील कार्यक्रमों में कार्य करते हैं, उन पर भारी ज़िम्मेदारी होती है.
लेकिन इसमें हिरासत के बारे में कुछ नहीं कहा गया.
इस आरोप पर कि वैज्ञानिक ईरान को तकनीक हस्तांतरित कर रहे थे.
बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान की परमाणु तकनीक को किसी तीसरे देश को हस्तांतरित न करने की की नीति है.
पश्चिमी देशों के गुप्तचर अधिकारियों के हवाले से ऐसी ख़बरें आईं थीं कि जिनमें आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तान उत्तर कोरिया और ईरान को परमाणु कार्यक्रम में मदद कर रहा है.
इस साल अमरीका ने काहूटा प्रयोगशाला पर सहयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था.