केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दल-बदल निरोधक क़ानून को और कड़ा बनाने के लिए एक संविधान संशोधन को मंज़ूरी दे दी है.
इसके तहत दल-बदल करने वाले व्यक्तियों को किसी लाभ के पद पर बैठने की अनुमति नहीं होगी.
चुनाव सुधारों की दिशा में एक और क़दम बढ़ाते हुए इस संशोधन को भी मंज़ूरी दे दी है कि लोकसभा या राज्य विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत को ही मंत्री बनाया जा सकता है.
संसद की स्थायी समिति की सिफ़ारिशों पर मंत्रिमंडल ने बुधवार देर रात 97वें संविधान संशोधन को स्वीकृति दे दी और उम्मीद जताई कि इसे संसद के शीतकालीन सत्र में ही पेश किया जाएगा.
बैठक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में हुई.
बड़ा क़दम
संसदीय कार्य मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया, "हम कोशिश करेंगे कि यह विधेयक इसी सत्र में पारित हो जाए."
उन्होंने कहा कि यह संशोधन चुनाव सुधार की दिशा में बड़ा क़दम है.
काँग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी की अगुआई वाली आंतरिक मामलों की संसद की स्थायी समिति की सिफ़ारिश पर कैबिनेट ने यह भी स्वीकार कर लिया कि अब मंत्रिमंडल का आकार निचले सदन की सदस्य संख्या का 15 प्रतिशत ही होगा.
पहले इस विधेयक में यह प्रावधान था कि दोनों सदनों की सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत को मंत्री बनाया जा सकता है.
हाल ही में स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद में पेश की गई थी.