राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार के पुलिस महानिदेशक से इंजीनियर सत्येंद्र दुबे हत्याकांड पर उनकी रिपोर्ट माँगी है.
आयोग ने मीडिया में छपी रिपोर्टों के आधार पर यह क़दम उठाया है.
मानवाधिकार आयोग की प्रवक्ता नताशा डिसिल्वा ने बीबीसी को बताया कि पुलिस महानिदेशक को रिपोर्ट के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है.
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को भी यह स्पष्ट करने को कहा है गया है कि क्या भ्रष्टाचार के बारे में सत्येंद्र दुबे की रिपोर्ट पर उसने कोई कार्रवाई की थी.
'इंडियन एक्सप्रेस' अख़बार के अनुसार दुबे की तब हत्या हो गई जब यह ख़बर लीक हुई कि 'महामार्ग परियोजना' में भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने शिकायत की है.
सीबीआई जाँच
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पहले ही मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दे दिए हैं.
उन्होंने कहा कि हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोग जहाँ भी हों उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा.
दुबे की 27 नवंबर को बिहार के गया ज़िले में हत्या कर दी गई थी जबकि वह वहाँ 'हाइवे प्रोजेक्ट' पर काम कर रहे थे.
इसे प्रधानमंत्री का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' माना जाता है. उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना न केवल मेरा सपना है बल्कि ये पूरे देश के लिए एक सपने जैसा है."
वाजपेयी ने दुबे को प्रतिभाशाली इंजीनियर बताते हुए उनके काम के प्रति धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि जो लोग भी इस परियोजना में काम कर रहे हैं वे निडर होकर काम करें.
वाजपेयी का कहना था कि वह प्रतिभा और कर्मठता को अपराधियों के हितों की भेंट नहीं चढ़ने देंगे.
निंदा
सत्येंद्र दुबे हत्या कांड की चारों तरफ़ आलोचना हो रही है.
इन्फ़ोसिस के संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति ने प्रधानमंत्री वाजपेयी से अनुरोध किया है कि वह मृतक इंजीनियर के परिजनों से बात करें.
आईआईटी के पूर्व छात्रों की संस्था को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार का सामना कर रहे एक ईमानदार व्यक्ति की हत्या की निंदा की जानी चाहिए. सार्वजनिक जीवन में मौजूद हर व्यक्ति को इसकी निंदा करनी चाहिए."
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को मामले से जुड़े ठेकेदार का ठेका रद्द करते हुए दोषियों को यथाशीघ्र सजा दिलानी चाहिए.