चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों की तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो गई है.
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल गया है जबकि काँग्रेस पार्टी ने दिल्ली पर अपनी पकड़ बनाए रखी है.
मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और घोषणा की है कि वे अब पार्टी विधायक दल के नेता नहीं रहेंगे.
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने 230 में से 173 सीटें हासिल की.
पार्टी ने उमा भारती के नेतृत्त्व में इस तरह दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है.
इसी तरह, छत्तीसगढ़ में भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव पर लगे रिश्वतख़ोरी के आरोपों के बावजूद पार्टी ने काँग्रेस को पीछे छोड़ दिया है.
छत्तीसगढ़ में भी भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है और दाँव पर लगी दिलीप सिंह जूदेव की मूँछ बच गई हैं.
राजस्थान के परिणामों ने कुछ विश्लेषकों को ज़रूर चौंकाया होगा, कहा जा रहा था कि वहाँ काँग्रेस अपनी सत्ता कायम रखेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
वसुंधरा राजे सिंधिया के नेतृत्व में राजस्थान में भाजपा ने कुल 200 सीटों में से 120 पर जीत हासिल करके बहुमत पा लिया है.
पार्टी ने पहली बार 100 सीटों का आँकड़ा पार कर लिया है.
माना जा रहा था कि अशोक गहलोत की सरकार को हटाना चुनावी राजनीति की अनुभवहीन खिलाड़ी मानी जाने वाली वसुंधरा राजे सिंधिया के लिए मुश्किल होगा.
दिल्ली में काँग्रेस ने अपनी सत्ता बरक़रार रखी है, पार्टी ने मदनलाल खुराना के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही भाजपा को काफ़ी पीछे छोड़ दिया है.
दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में काँग्रेस ने 47 सीटें जीत ली हैं जबकि भाजपा के हाथ सिर्फ़ 20 सीटें लगी हैं.
ज़ाहिर है, इन चुनाव परिणामों से केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का हौसला ज़रूर बुलंद होगा क्योंकि अगले वर्ष संसदीय चुनाव होने वाले हैं.