छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री अजीत जोगी को नकारते हुए भारतीय जनता पार्टी को सत्ता सौंपी है.
नवगठित राज्य में पहली बार हुए चुनाव में पार्टी ने 90 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया है.
भाजपा ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर किसी को भी पेश नहीं किया था इसलिए अटकलों का बाज़ार गर्म है और राज्य के भाजपा प्रभारी राजनाथ सिंह के अनुसार विधायकों से चर्चा के बाद ही इस बात का फ़ैसला किया जाएगा.
मुख्यमंत्री अजीत जोगी भाजपा के नंद कुमार साय को 52,141 मतों से हराकर अपनी सीट बचाने में क़ामयाब हो गए मगर कांग्रेस की चुनावी नैया वह पार नहीं लगा सके.
हारने वाले प्रमुख लोगों में रायगढ़ सीट से स्वास्थ्य मंत्री केके गुप्ता, नागरिक आपूर्ति मंत्री चनेशराम रथिया, जशपुर से विक्रम भगत और डोंगरगाँव से महिला और बाल कल्याण मंत्री गीता देवी शामिल हैं.
शुरुआती तौर पर तो लग रहा था कि मुक़ाबला काँटे का चल रहा है मगर धीरे-धीरे जैसे ही नतीजे आने लगे भाजपा ने बढ़त बना ली.
इस बीच निवर्तमान मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा है कि वह जनमत का सम्मान करेंगे और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएँगे.
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों से साठ-गाँठ का आरोप लगते रहे थे मगर उन्हीं क्षेत्रों में उनकी पार्टी को नुक़सान हुआ है.
जोगी के अनुसार नतीजे साफ़ करते हैं कि ये आरोप निराधार थे.
कौन होगा नेता?
चुनाव के शुरुआती दौर में तो केंद्र में मंत्री दिलीप सिंह जूदेव का नाम चर्चा में था मगर रिश्वत कांड में उनका नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था और माना जा रहा है कि शायद उसी वजह से उनका दावा नहीं रहेगा.
मगर राज्य के प्रभारी राजनाथ सिंह से जब इस बारे में पूछा गया कि क्या जूदेव के नाम पर भी विचार होगा तो उनका कहना था कि वह इस बारे में विधायकों से बातचीत के बाद ही कुछ फ़ैसला करेंगे.
जूदेव ने तो ये भी कह दिया था कि अगर भाजपा चुनाव नहीं जीती तो वह अपनी मूँछ कटा देंगे.
ऐसे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह का नाम भी काफ़ी चर्चा में है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि चुनाव के बाद बनने वाली भाजपा सरकार जोगी के विवादास्पद फ़ैसलों की समीक्षा भी करेगी.
उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस बात का फ़ैसला हो जाएगा कि मुख्यमंत्री की गद्दी कौन सँभालेगा.