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मध्य प्रदेश में भाजपा को भारी बहुमत

मध्य प्रदेश की मतपेटियों से निकले जनादेश के कारण काँग्रेस प्रदेश की सत्ता से बाहर हो गई है और भारतीय जनता पार्टी का सत्ता पर कब्ज़ा हो गया है.

काँग्रेस की ऐसी बुरी हार तो 1977 में भी नहीं हुई थी.

इतने प्रचंड बहुमत की भाजपा को भी उम्मीद नहीं थी.

माना जा रहा है कि काँग्रेस की हार दिग्विजय सिंह और उनके विकास के मॉडल और अतिआत्मविश्वास की है.

दस साल के शासन के बाद भी काँग्रेस ये नहीं समझ पायी कि सड़क और बिजली आम लोगों की बुनियादी ज़रुरतें हैं.

प्रदेश के मतदाताओं ने भाजपा को बड़ी ज़िम्मेदारी सौंप दी है और उसको उमा भारती कैसे पूरा कर पाएँगी, इस पर लोगों की निगाहें लगीं हुईं हैं.

पच्चीस से तीस हजार करोड़ का रुपयों का कर्ज, गड्ढे वाली सड़कें और लडखड़ाई बिजली व्यवस्था को वापस पटरी पर लाने का जनादेश भाजपा को मिला है.

भाजपा ने एक समयबद्ध कार्यक्रम घोषित किया है जिसमें 28 हजार दैनिकभोगियों के वापस सरकारी नौकरियों में लेने जैसे वायदे भी शामिल हैं.

मध्य प्रदेश में चुनाव बहुत अहम माने जा रहे थे.

यही वजह है कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अनेक चुनावी सभाएँ संबोधित कीं थीं.