स्टांप पेपर घोटाले की जाँच से मुंबई उच्च न्यायालय भले ही संतुष्ट हो मगर महाराष्ट्र के राज्यपाल को लगता है कि इसकी जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो से ही करवानी चाहिए.
राज्यपाल मोहम्मद फ़ज़ल ने बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में कहा कि वह राज्य के मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे से बात करेंगे कि ये मामला केंद्रीय जाँच ब्यूरो के सुपुर्द कर दिया जाए.
उनका कहना था कि इससे 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा.
इस बीच केंद्र सरकार ने भी कहा कि वह इस मामले में सीबीआई की जाँच के लिए उच्चतम न्यायालय से निर्देश माँगेगी.
केंद्रीय वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने पत्रकारों को ये जानकारी दी.
इस बीच पुणे की एक अदालत ने मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त आरएस शर्मा को नौ सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
मंगलवार से ही संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू हो गया है.
इधर भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि राज्य को ये मामला अब केंद्र को सौंप देना चाहिए जिससे वह अंतिम रूप से फ़ैसला कर सके कि किस जाँच एजेंसी से इसकी जाँच करवानी है.
राज्यपाल फ़ज़ल ने कहा कि ये मसला किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रह गया है और इसमें कई राज्यों के शामिल होने की बात सामने आई है.
उनका कहना था कि इसके अलावा ये मामला कई हज़ार करोड़ का है तो ऐसे में बेहतर यही होगा कि मामला केंद्रीय जाँच एजेंसी को सौंप दिया जाए जिससे सारी स्थिति स्पष्ट हो सके.