भारत के चार राज्यों- दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 590 सीटों पर मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.
इन राज्यों में मतगणना चार दिसंबर को होनी है.
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों में मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं.
हरियाणा और पंजाब सहित इन राज्यों से सटे कुल दस राज्यों की सीमाएं सील करने के आदेश दिए गए हैं ताकि आसपास के इलाकों से असामाजिक तत्व चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी पैदा न करने पाएँ.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इन चुनावों की देख-रेख के लिए चुनाव आयोग ने साढ़े पाँच लाख कर्मचारी तैनात किए हैं.
साथ ही लगभग चार लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.
छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित आदिवासी बस्तर में अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है.
चुनाव आयोग ने 320 चुनाव पर्यवेक्षक तैनात किए हैं जो मतदान पर अपनी नज़र रखेंगे.
चार राज्यों की विधानसभा चुनावों मे लगभग नौ करोड़ चालीस लाख मतदाता हिस्सा लेंगे.
कहा जा रहा है कि इन चुनावों के परिणाम अगले साल होने वाले आमचुनावों को लेकर मतदाता के रुझान की भविष्यवाणी करेंगे.
इन सभी राज्यों में इस समय कांग्रेस की सरकारें हैं और टक्कर काँग्रेस और भाजपा के बीच है.
दिल्ली
राजधानी दिल्ली सत्तारुढ़ कांग्रेस ने पिछली बार भाजपा को बुरी तरह हराने के बाद अपनी सरकार बनाई थी.
लेकिन इस बार चुनाव में कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जो पूरे राज्य में एक समान असर डाल रहा हो.
इस बार भाजपा ने पुराने मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना को फिर उम्मीदवार बनाया है.
कांग्रेस की ओर से मुख्यममंत्री शीला दीक्षित फिर उम्मीदवार हैं.
राजस्थान
राजस्थान में चुनावी माहौल गुजरात के चुनाव के बाद से ही बनने लगा था.
काँग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर मैदान में हैं.
उनके मुक़ाबले में भाजपा ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दिलवाकर वसुंधरा राजे सिंधिया को मैदान में उतारा है.
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में पूरे 10 साल कांग्रेस के मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने शासन किया है.
वहाँ मुक़ाबला ऐतिहासिक बताया जा रहा है.
मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह घोषणा कर चुके हैं कि यदि वे चुनाव हार गए तो दस साल तक कोई पद नहीं लेंगे.
भारतीय जनता पार्टी ने दस साल की राज्य की दिग्विजयसिंह सरकार की विफलताओं को निशाना बनाया है.
छत्तीसगढ़
इस नए राज्य के चुनाव ने इस बार चार राज्यों के चुनाव को एक नया मुद्दा दे दिया.
यहाँ भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार दिलीप सिंह जूदेव की रिश्वत लेते हुए फ़िल्म को सभी राज्यों में उछाला गया.
काँग्रेस मुख्यमंत्री अजीत जोगी के काम पर वोट माँगती रही हैं.
उधर भाजपा ने अपना प्रचार अजीत जोगी और उनके बेटे के ख़िलाफ़ केंद्रित रखा.
यहाँ तक कि जूदेव की रिश्वत लेते हुए फ़िल्म को भी जोगी का कारनामा बताया गया.