भारत सरकार संसद में ऐसा विधेयक लाने जा रही है जिसके तहत नक़ली दवा बनाने वालों को मृत्युदंड दिया जा सकेगा.
भारत की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज ने बीबीसी हिंदी सेवा को बताया कि यह विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में लाया जाएगा.
वे 'विश्व एड्स दिवस' की पूर्व संध्या पर बीबीसी हिंदी सेवा के साप्ताहिक कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब दे रही थीं.
उन्होंने ये भी कहा है कि भारत में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को और कारगर बनाने के लिए 'प्राइवेट' डॉक्टरों को भी इस व्यवस्था में भूमिका दिए जाने पर विचार हो रहा है.
मुफ़्त दवा
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "संसद के इस सत्र में लाए जाने वाले उस विधेयक का मसौदा तैयार हो गया है जिसके तहत नक़ली दवा बनाने वालों को मृत्युदंड दिए जाने का प्रावधान है."
उनका कहना था कि उनका मानना है कि जो लोग नक़ली दवा बनाने हैं वे हत्या से संगीन जुर्म करते हैं.
उनका कहना था कि हत्या करने वाला तो किसी एक व्यक्ति की जान लेता है लेकिन नक़ली दवा बनाने वाले सामूहिक हत्या के दोषी होते हैं.
सुषमा स्वराज ने कहा कि इस विधेयक के तहत दवा को उसकी असल कीमत से अधिक मूल्य पर बेचना भी जुर्म होगा.
सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस बारे में एक नया कार्यक्रम लागू करने पर विचार हो रहा है.
उनका कहना था कि इस कार्यक्रम में अन्य देशों की तरह भारत में भी 'प्राइवेट' डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का हिस्सा बनाकर उन्हें भी भूमिका दिए जाने पर विचार हो रहा है.
एड्स के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि एड्स की रोकथाम और इलाज को सरकारी नीति का हिस्सा बनाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि स्त्रियों और 15 साल की आयु से कम के बच्चो और एड्स से पीड़ित मरीज़ो को पहली बार ऐंटी-रेट्रोवायरल दवाएँ सरकारी हस्पतालों में देने की योजना है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का कहना था कि सरकारी हस्पतालों में एक अप्रैल 2004 से हर वर्ष एक लाख मरीज़ों को ये दवाएँ दी जाएँगी.
उनका कहना था कि इस पर होने वाले लगभग 200 करोड़ रुपए का खर्च सरकार उठाएगी.
इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए नेशनल एड्स नियंत्रण संस्थान (नैको) की प्रोग्राम निदेशक मीनाक्षी दत्ता घोष ने बताया कि एड्स के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए अमिताभ बच्चन, शाहरुख ख़ान, प्रीति ज़िंटा और तब्बू को लेकर कार्यक्रम बनाए गए हैं.