मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली की विधानसभाओं के लिए प्रचार शनिवार शाम समाप्त हो रहा है.
लेकिन इस दौरान उम्मीदवार घर-घर जाकर अपना जनसंपर्क अभियान जारी रख सकते हैं.
इन चारों राज्यों में एक दिसंबर को मतदान होना है और मतगणना का काम चार दिसंबर को किया जाएगा.
चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदान के 48 घंटे पूर्व जनसभाओं, जुलूसों पर रोक लग जाती है.
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़,राजस्थान और दिल्ली के विधानसभा चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
एक तरह से ये चुनाव चार प्रमुख हिंदी-भाषी राज्यों में यानी उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से में राजनीतिक मूड भाँपने का मौक़ा देंगे.
रुझान जानने का मौक़ा
इनसे 600 से ज़्यादा विधानसभा क्षेत्रों में लोगों का रुझान जानने का मौक़ा मिलेगा.
इन सभी राज्यों में काँग्रेस की सीधी टक्कर भारतीय जनता पार्टी से है.
यही वजह है कि इन राज्यों में चुनाव प्रचार की बागडोर भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने थामी.
दूसरी ओर काँग्रेस के लिए सोनिया गांधी ने प्रचार अभियान का नेतृत्व किया है.
माना जा रहा है कि इन चुनावों के बाद देश का मूड जानकर ही केंद्र सरकार ये फ़ैसला करेगी कि लोकसभा चुनाव कब करवाए जाएँ.