भारत में आजकल कम ही लोगों के घरों में खाना पक रहा है.
वजह यह है कि शादियों की ऐसी बाढ़ आई है कि दावतें खाते-खाते लोग अघाने लगे हैं.
एक परेशानी यह कि कहाँ जाएँ, कहाँ न जाएँ.
दरअसल, बात यह है कि भारत में इस समय शादियों का 'शुभ मुहूर्त' है.
और उसमें भी 27 नवंबर का अपना ही महत्व है.
कहा जा रहा है कि दिल्ली में ही इस दिन चौदह हज़ार बारातें निकलीं.
ट्रैफ़िक का जो हाल हुआ वह तो आप समझ ही सकते हैं.
सिर्फ़ नवंबर के महीने में ही दिल्लीवासी चालीस हज़ार से ज़्यादा युवक और युवतियों को परिणय बंधन में बंधता देख लेंगे.
'शुभ मुहूर्त'
यह हड़बड़ी इसलिए क्योंकि ज्योतिषियों का कहना है कि जो लोग इस दौरान विवाह बंधन में बंध जाएँगे उनके वैवाहिक संबंध सुखद रहेंगे.
इससे पहले ज्योतिषियों ने ग्रहों की दशा ख़राब बताई थी और उसकी वजह से जुलाई और अक्तूबर के बीच बहुत कम शादियाँ हुईं.
इतना ही नहीं, भारत में सोने की क़ीमतें आकाश छूने लगी हैं और सुनारों की चाँदी हो रही है.
मुंबई में दस ग्राम सोना 5970 रुपये का बिक रहा है.
फूल बेचने वालों की भी लगता है लॉटरी निकल आई है.
एक समस्या है कि भारत में इन तीन दिनों में सफ़ेद घोड़ियों की कुल तादाद दुल्हों से कम पड़ती दिख रही है.
इसी तरह शादियाँ कराने के लिए आसानी से पुरोहित नहीं मिल रहे हैं.