भारत में डॉक्टर और विशेषज्ञ एक साधु को लेकर हैरत में हैं जिनका दावा है कि उन्होंने पिछले कई दशकों से न तो कुछ खाया है और न ही पिया है.
सत्तर साल की उम्र के इन साधु, प्रह्लाद ज्ञानी ने अहमदाबाद के स्टर्लिंग अस्पताल में दस दिन डॉक्टरों की गहरी निगरानी में बिताए.
अस्पताल के उप निरीक्षक डॉक्टर दिनेश देसाई का कहना है कि उस दौरान उन्होंने न तो कुछ खाया और न ही कभी शौचालाय का रुख़ किया.
डॉक्टर इस बात पर अचंभे में हैं कि साधु इस सबके बावजूद पूरी तरह स्वस्थ हैं.
डॉक्टर देसाई का कहना है, उनके कई टेस्ट हुए और पाया गया कि उनकी शारीरिक स्थिति किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह है.
साधु अपना ज़्यादातर समय गुजरात के अंबाजी मंदिर के क़रीब एक गुफा में बिताते हैं.
अस्पताल में उनको दस दिन विशेष रूप से बनाए एक कमरे में रखा गया जहाँ शौचालय की सुविधा नहीं थी और लगातार वीडियो के ज़रिए निगरानी रखी जाती थी.
अपने दावे को पूरी तरह साबित करने के लिए साधु ने दस दिन अस्पताल में स्नान भी नहीं किया.
बस एक द्रव्य जो उनके मुँह में जाता था वह था थोड़ा सा पानी, जिससे वह कुल्ला भर कर लेते थे.
कुल्ला करने के लिए उन्हें सौ मिलीलीटर पानी दिया जाता था और उनके थूकने के बाद उसे मापा जाता था यह जानने के लिए कि कहीं उन्होंने उसमें से कुछ पिया तो नहीं है.
अहमदाबाद के डॉक्टरों की एक संस्था ने अपने बयान में कहा है कि उनके शरीर में पानी न जा पाने के बावजूद मूत्र बनता था लेकिन वह मूत्राशय में ही जज़्ब हो जाता था.
साधु का दावा है कि उन्हें आठ साल की उम्र में देवी ने वरदान दिया था और तब से वह गुफाओं में ही रहे हैं.
उनका कहना है, "मुझे भोजन या पानी की ज़रूरत ही नहीं पड़ती".
वह मेहसाणा के चारोड गाँव में पले-बढ़े और अंबाजी के भक्त होने के नाते लाल साड़ी पहनते हैं, नाक में कील, चूड़ियाँ और बालों में फूल उनके अन्य श्रृंगार हैं.
वह माथे पर लाल बिंदी और माँग में सिंदूर भी भरते हैं, उनके अनुयायी उन्हें 'माताजी' कह कर संबोधित करते हैं.
डॉक्टर उन पर कुछ और परीक्षण करने का इरादा कर रहे हैं.