भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में हिंदी भाषी लोगों के ख़िलाफ़ ताज़ा हिंसा में तीन और लोगों की हत्या कर दी गई है.
अधिकारियों ने अनुसार पिछले 10 दिनों से जारी हिंसा में कम से कम 50 लोग मारे जा चुके हैं.
गुवाहाटी में एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि सोमवार रात प्रतिबंधित नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (एनडीएफ़बी) के चरमपंथियों ने दारांग ज़िले के खांगलबारी गाँव पर हमला किया.
यह इलाक़ा राजधानी गुवाहाटी से 135 किलोमीटर दूर है.
दारांग ज़िले के पुलिस प्रमुख कबीर अहमद ने बताया, "चरमपंथियों ने बिहार से आए लोगों को यह कहकर घर से बाहर निकाला कि वे पुलिसवाले हैं. जैसे ही लोग घर से बाहर आए उन पर अँधाधुँध गोलियाँ चला दी गई."
उन्होंने बताया कि गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो पुरुष और एक महिला है. हमले में नौ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
पुलिस प्रमुख ने बताया कि चरमपंथियों ने जाते-जाते कई घरों में आग भी लगा दी.
पहली घटना
असम के गृह आयुक्त केडी त्रिपाठी ने बताया है कि निचले असम के ज़िलों में यह इस तरह की पहली घटना है.
असम में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में बाहरी लोगों को मौक़ा दिए जाने को लेकर शुरू हुआ विरोध पिछले कई दिनों से हिंसक रूप ले चुका है.
हिंसा की सबसे ज़्यादा घटनाएँ राज्य के तिनसुकिया ज़िले में हुई हैं. लेकिन पिछले दो दिनों से वहाँ स्थिति सामान्य है.
इन सभी घटनाओं के पीछे संदिग्ध उल्फ़ा चरमपंथियों का हाथ बताया जा रहा था.
यह पहला मौक़ा है कि एनडीएफ़बी के चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.
केंद्र सरकार ने राज्य में अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियाँ भेज दी है. राज्य के कई इलाक़ों में तो अभी भी कर्फ़्यू लगा हुआ है.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव असम की सदभावना यात्रा पर हैं.