भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में हिंदी भाषी लोगों के ख़िलाफ़ जारी हिंसा में शनिवार को तिनसुकिया ज़िले में दो अलग-अलग घटनाओं में 11 लोगों की हत्या कर दी गई है.
राज्य में हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में अभी तक 38 लोगों की जानें जा चुकी हैं.
हिंसा की ताज़ा घटनाओं उस समय हुईं हैं कि जब केंद्रीय राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद के नेतृत्व में केंद्रीय दल असम के दौरे पर है.
असम पुलिस की गुप्तचर शाखा के प्रमुख खगेन सरमा ने बताया कि ताज़ा हमले में ईंट भटटे पर काम कर रहे मज़दूरों को निशाना बनाया गया है.
उन्होंने बताया कि कर्फ़्यू में ढ़ील के दौरान महाकाली भट्टे पर पहला हमला हुआ जिसमे उन्होंने आठ मज़दूरों की हत्या कर दी.
इसके बाद इसी ग्रुप ने एक अन्य ईंट भट्टे के हिंदी भाषी मज़दूरों पर हमला किया जिसमें तीन मज़दूर मारे गए.
उन्होंने बताया कि केंद्रीय सुरक्षाबलों को घटनास्थल पर भेजा गया है.
खगेन सरमा का कहना था कि हमलों के पीछे अलगाववादी संगठन उल्फ़ा का हाथ हो सकता है.
हिंसा की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने तिनसुकिया ज़िले के उपायुक्त का तबादला कर दिया है और ज़िले के पुलिस अधीक्षक अपूर्व जीवन बरुआ को निलंबित कर दिया है.
शनिवार को केंद्रीय दल ने हिंसा से प्रभावित कई क्षेत्रों का दौरा किया.
ऐसे ही एक क्षेत्र में असम के छात्र जमा हो गए और उन्होंने केंद्रीय दल के ख़िलाफ़ नारेबाजी की.
शुक्रवार को हिंसा की कोई घटना की ख़बर नहीं आई थी और माना जा रहा था कि स्थिति सामान्य हो चली है.
इसके बाद हिंसा से प्रभावित तिनसुकिया ज़िले में कर्फ़्यू में कुछ घंटे की छूट दी गई थी.
इसके पहले तिनसुकिया शहर में 24 घंटे का कर्फ़्यू चल रहा था.
असम में बिहार से आकर बसे लोगों के ख़िलाफ़ भड़की हिंसा को शांत करने के लिए केंद्रीय बलों की मदद भी ली जा रही है.
राज्य में हिंसा रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में भाग लेने आए दूसरे राज्यों के परीक्षार्थियों के साथ मारपीट के साथ शुरू हुई थी.
गिरफ़्तारियाँ
राज्य में हिंसा की रोकथाम में अभी तक लगभग 450 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
असम के कई शहरों में एहतियात के तौर पर अलग-अलग समय के लिए कर्फ़्यू लगाया गया है.
तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ ज़िलों में कर्फ़्यू के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है और रेल यातायात में भी रुकावट आई है.
इन दोनों ज़िलों में बिहार के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं.
असम की हिंसा पर भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी चिंता प्रकट की है और राज्य के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से बात की है.