भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगों से जुड़े नौ मामलों की सुनवाई पर रोक लगा दी है.
न्यायालय ने यह फ़ैसला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक याचिका पर दिया.
आयोग ने इन मामलों की सुनवाई गुजरात से बाहर करवाने की अपील की थी.
उसका कहना था कि "गवाहों को धमकाया जा रहा है और दंगो को जाँच सही तरीके से नहीं की जा रही".
सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार से पूछा है कि इन मामलों की सुनवाई गुजरात से बाहर क्यों न की जाए.
सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 19 दिसंबर तक का समय दिया गया है.
मार्च 2002 में गुजरात के सांप्रदायिक दंगों में लगभग दो हज़ार लोग मारे गए थे.
उच्चाधिकार समिति
इससे पहले न्यायालय की मदद के लिए नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने दंगों से संबंधित मुकदमों की निगरानी के लिए एक उच्चाधिकार-प्राप्त समिति के गठन का अनुरोध किया.
साल्वे ने कहा ऐसी समिति का गठन न्याय-प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बढ़ाएगा.
लेकिन अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया.
उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ऐसी समिति गठित करने को तैयार है.
उन्होंने कहा कि इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत न्यायाधीश की सहमति भी ली जा चुकी है.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बहुचर्चित बेस्ट बेकरी कांड के सभी 21 अभियुक्तों को बरी किए जाने के फ़ैसले को चुनौती देने के साथ-साथ गोधरा, गुलबर्ग सोसाइटी, नरोडा पाटिया और सदरपुरा की घटनाओं से संबंधित मामलों को राज्य के बाहर सुने जाने की अपील की थी.