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एड्स के लिए सस्ती दवा ज़रूरी: क्लिंटन

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का कहना है कि एड्स की महामारी पर बिना सस्ती दवाओं के काबू नहीं पाया जा सकता है.

उनका कहना था, "मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूँ कि बिना सस्ते इलाज के हम एड्स से निपट नहीं सकते."

बिल क्लिंटन इन दिनों भारत के दौरे पर हैं.

शुक्रवार को वे दिल्ली के नज़दीक गुड़गाँव स्थित रैनबैक्सी की रिसर्च लैब को देखने गए.

क्लिंटन का कहना था कि सस्ती दवाओं का फायदा ये है कि परीक्षण में यदि एचआईवी परीक्षण सकारात्मक निकले तो इसके बाद भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है.

उनका कहना था कि दवाओं की इसलिए महत्वपूर्ण भूमिका है.

क्लिंटन का कहना था कि बिना इसके इलाज के आप युवाओं को आगे आकर टेस्ट करवाने के लिए कैसे कहेंगे.

समझौता

बिल क्लिंटन की संस्था, विलियम जे क्लिंटन प्रेसिंडेंशियल फ़ाउंडेशन ने 23 अक्टूबर को चार दवा कंपनियों से एक समझौता किया था जिसके तहत विकासशील देशों को एड्स की सस्ती दवा हासिल हो सकेगी.

इस समझौते के तहत चार दवा कंपनियाँ पेंटेंट दवाइयों की वर्तमान क़ीमतों से एक तिहाई क़ीमत पर क्लिंटन फ़ाउंडेशन को दवा उपलब्ध करवाएँगी.

इनमें से तीन कंपनियाँ भारत की हैं जिसमें रैनबैक्सी, सिपला और मैट्रिक्स दवा कंपनियाँ शामिल हैं.

इस समझौते के तहत दवा की क़ीमत डेढ़ डॉलर यानी लगभग सत्तर रुपए से घटकर बीस रुपए हो जाएगी.

क्लिंटन फ़ाउंडेशन रवांडा, तंज़ानिया और मोज़ाम्बिक सहित कई अफ़्रीकी देशों में एचआईवी-एड्स के ख़िलाफ़ सक्रिय है.

क्लिंटन ने मार्च,2000 में अमरीका के राष्ट्रपति के रूप में भारत का दौरा किया था.

क्लिंटन इस समय दो दिनों की भारत यात्रा पर आए हुए हैं.

उनका भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी मुलाक़ात का कार्यक्रम है.