भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में हिंदीभाषियों के ख़िलाफ़ हिंसा के बाद अब स्थिति सामान्य होती जा रही है. लेकिन ख़बरें हैं कि वहाँ अब भी तनाव बना हुआ है.
हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में अभी तक 29 लोगों की जान जा चुकी है.
हिंसा से प्रभावित तिनसुकिया ज़िले में कर्फ़्यू में कुछ घंटे की छूट दी गई है. इसके पहले तिनसुकिया शहर में 24 घंटे का कर्फ़्यू चल रहा था.
समाचार एजेंसी एएफपी ने पुलिस प्रवक्ता के हवाले से कहा है," रात में कहीं से भी कोई हिंसा की घटना की ख़बर नहीं है और कुल मिलाकर स्थिति में सुधार नज़र आ रहा है."
असम में बिहार से आकर बसे लोगों के ख़िलाफ़ भड़की हिंसा को शांत करने के लिए केंद्रीय बलों की मदद भी ली गई है.
गिरफ़्तारियाँ
राज्य में हिंसा की रोकथाम में अभी तक लगभग 450 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
असम के कई शहरों में एहतियात के तौर पर अलग-अलग समय के लिए कर्फ़्यू लगाया गया था.
तिनसुकिया में और डिब्रूगढ़ ज़िलों में कर्फ़्यू के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है.
यहाँ से ट्रेनों के आवागमन में भी बाधा पड़ी है.
इन दोनों ज़िलों में बिहार के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं.
असम की हिंसा पर भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी चिंता प्रकट की है और राज्य के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से बात की है.
असम के गृह सचिव ने बताया है कि तिनसुकिया, नौगाँव, डिब्रूगढ़ और सोनितपुर ज़िलों में स्थिति नियंत्रित करने के लिए सेना की भी मदद ली गई है.
इस बीच असम में आम लोगों की तरफ़ से शांति बहाल करने की कोशिश चल रही है.
राज्य की राजधानी गुवाहाटी में गुरूवार को एक शांति मार्च निकाला गया जिसमें "असमिया-बिहारी भाई-भाई" के नारे लगाए गए.
शुक्रवार को भी यहाँ एक शांति रैली निकालने का कार्यक्रम है.