भारत के उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के दो मुक़दमो को कर्नाटक की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया है.
ये दोनों मामले आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित हैं.
जयललिता पर भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत 66 करोड़ रुपयों से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के मामले चेन्नई की विशेष अदालत में भी लंबित हैं.
उच्चतम न्यायालय ने डीएमके नेता के अनबज़घन की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फ़ैसला सुनाया.
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कर्नाटक सरकार राज्य के उच्च-न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के बाद एक महीने के भीतर एक विशेष अदालत का गठन करेगी.
न्यायालय ने जयललिता सरकार को निर्देश दिया है कि वो इस मुक़दमे से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और रिकॉर्ड कर्नाटक की विशेष अदालत को सौंपें.
आरोप-प्रत्यारोप
डीएमके ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार के प्रभाव में आकर इन मुक़दमों को रफ़ा दफ़ा करने की जल्दबाज़ी की जा रही है.
याचिका में ये भी आरोप लगाया गया था कि एआईडीएमके के कार्यकर्ता इन मामलों की जाँच करने वाले अधिकारियों और गवाहों को आतंकित कर रहे हैं.
डीएमके नेता ने ये सवाल भी उठाया था कि यदि किसी मामले में मुख्यमंत्री ही अभियुक्त हो तो अभियोजन पक्ष से निष्पक्ष कार्यवाही करवाने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने 28 फरवरी 2003 को चेन्नई की अदालत में लंबित इन मुक़दमों की सुनवाई पर रोक लगा दी थी.