आंध्र प्रदेश में राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी है.
इसके पहले तेलुगू देशम सरकार ने समय पूर्व चुनाव कराने के लिए विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश की थी.
शुक्रवार को हैदराबाद में चंद्रबाबू नायडू सरकार की मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई.
गुरुवार को सत्ताधारी तेलुगू देशम की पोलित ब्यूरो की बैठक में नया जनादेश लेने का फ़ैसला किया गया था.
मंत्रिमंडल की बैठक से बाहर आकर राज्य के गृहमंत्री टी देवेंद्र गौड़ ने पत्रकारों से कहा,"हमने नक्सलवादियों के मुद्दे पर नया जनादेश लेने के बारे में लाए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है."
मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू इस बैठक के बाद राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला को मंत्रिमंडल के फ़ैसले की जानकारी देकर उनसे विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश कर दी थी.
कारण
तेलुगू देशम यह कह रही है कि राज्य में नक्सलवाद से निपटने के लिए और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की नीतियों के ख़िलाफ़ जनादेश लेने का फ़ैसला लिया गया है.
लेकिन माना जा रहा है कि कुछ समय पहले मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर हुए हमले के बाद सहानुभूति का लाभ उठाते हुए सत्ताधारी दल चुनाव करवाना चाहता है.
वैसे सामान्य स्थिति में विधानसभा चुनाव अगले साल यानी 2004 के अक्तूबर में होने हैं.
मगर अब अनुमान है कि ये चुनाव फ़रवरी में ही करवाए जा सकते हैं.
हालांकि राज्य में विपक्षी दल काँग्रेस समय से पहले चुनाव कराए जाने का विरोध कर रही है.
कॉंग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम को लोगों को स्पष्ट बताना पड़ेगा कि दो तिहाई बहुमत के बाबजूद वे जल्द चुनाव क्यों कराना चाहते हैं.