श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि वे राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के साथ शुरू हुए सत्ता संघर्ष को सुलझाने के लिए चुनाव के पक्ष में हैं.
उन्होंने यह बात अपने प्रवक्ता जीएल पेरिस के ज़रिए कही.
पेरिस ने कहा, "हमें कोई संदेह नहीं कि लोग हमारी कोशिशों का समर्थन करते हैं और हम इसके लिए चुनाव में उतरने के लिए तैयार हैं."
पेरिस ने कहा कि प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को ज़्यादातर सांसदों का समर्थन प्राप्त है.
उन्होंने ये भी कहा कि मंत्रिमंडल की यह राय है कि तमिल विद्रोहियों के साथ शांति प्रयासों की ज़िम्मेदारी फ़िलहाल राष्ट्रपति कुमारतुंगा ही संभालें.
राष्ट्रपति कुमारतुंगा तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच हुआ समझौते को अवैध बताती हैं.
पिछले सप्ताह उन्होंने बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सरकार के तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त कर दिया था.
बर्ख़ास्त मंत्रियों में रक्षा, आतंरिक सुरक्षा और सूचना मामलों के मंत्री थे.
प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे का कहना है कि इन मंत्रालयों पर नियंत्रण के बिना वे तमिल विद्रोहियों से बातचीत नहीं कर सकते.
विरोध
इस बीच श्रीलंका में शांति स्थापना के प्रयासों के लिए नोर्वे से एक विशेष दल श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुँच रहा है.
जीएल पेरिस ने कहा है, "देश में शांति की बहाली के लिए तमिल विद्रोहियों से अब बात तभी हो पाएगी जब हम पहले बुनियादी मुद्दों को सुलझा लें."
प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे की शांति वार्ता के लिए गठित टीम का नेतृत्व पेरिस ने ही किया था.
उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से कहा,"पिछले चार दिनों की गतिविधियों पर नज़र डालें तो देश में शांति बहाली के प्रयासों के मामले में काम बिगड़ा ही है."
उन्होंने रविवार को कहा था कि हो सकता है कि प्रधानमंत्री अब राष्ट्रपति कुमारतुंगा से तमिल विद्रोहियों से बातचीत अपने हाथ में लेने को कहें.