श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के एक प्रवक्ता ने कहा है कि देश में ताज़ा राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वे शांति प्रक्रिया को पटरी पर रखने की ज़िम्मेदारी अब और नहीं उठा सकते.
प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने श्रीलंका में शांति स्थापित करने और वहाँ पुनर्वास की देखरेख करने के लिए बनी अंतरराष्ट्रीय समिति के देशों को इस बारे में सूचित किया है.
उन्होंने अमरीका, नॉर्वे, यूरोपीय संघ और भारत के दूतों से कहा है कि वे शांति प्रयासों का काम राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा को सोंप रहे हैं.
उन्होंने कहा कि उनके पास रक्षा और आंतरिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय अब नहीं हैं और क्योंकि ये राष्ट्रपति कुमारतुंगा के पास हैं तो शांति प्रय़ासों के लिए अब वे ही ज़िम्मेदार रहेंगी.
सरकार के प्रवक्ता जीएल पियरिस ने कहा कि ये समनवय की बात है और यदि प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के पास ये मंत्रालय नहीं हैं तो वे शांति प्रयासों की ज़िम्मेदारी नहीं ले सकते.
पर्यवेक्षकों के अनुसार युनाइटेड नेशनल पार्टी के इस रुख़ से स्पष्ट हो गया है कि वह राष्ट्रपति कुमारतुंगा के साथ किसी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं.
उधर राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने विशेष इंटरव्यू में कहा है कि इन मंत्रालयों के लिए किसी उप मंत्री की नियुक्ति पर विचार हो सकता है.
उनका कहना था कि उन्हें अमरीकी राष्ट्रपति बुश का समर्थन हासिल है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बुश ने प्रधानमंत्री की शांति प्रयासों पर प्रशंसा की है लेकिन ये भी कहा कि प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे और वे ख़ुद एक ही सरकार का हिस्सा हैं.