श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने कहा है कि उन्हें यह भरोसा है कि तमिल विद्रोही शांति तो चाहते हैं लेकिन एक अलग राज्य लेकर.
गत सप्ताह तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त करने के बाद चंद्रिका कुमारतुंगा ने बीबीसी को इंटरव्यू दिया.
उन्होंने कहा कि तमिल विद्रोहियों और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने पिछले साल जो संघर्ष विराम समझौता किया था वह क़ानूनी नहीं था क्योंकि ख़ुद उन्होंने इस पर दस्तख़त नहीं किए थे.
यह पूछे जाने पर कि फिर उन्होंने समझौते अपनी सहमति क्यों दी, चंद्रिका कुमारतुंगा ने कहा कि वह भविष्य में ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर कर सकती हैं.
लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस बारे में आश्वस्त नहीं हैं कि तमिल विद्रोही इस समझौते के बारे में गंभीर हैं.
"मैं समझती हूँ कि तमिल विद्रोही शांति तो चाहते हैं लेकिन एक अलग राज्य लेकर. उन्होंने हाल में जो दस्तावेज़ पेश किया है उससे तो यही झलकता है."
दूसरी तरफ़ प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा है कि बर्ख़ास्त किए गए तीनों मंत्रियों को बहाल किया जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के समर्थक आरोप लगा रहे हैं कि चंद्रिका कुमारतुंगा ने सरकार की सत्ता हड़पने के लिए हाल के क़दम उठाए हैं.
न्यायमंत्री लोकूभंडारा का कहना था कि पहले ग़लत तरीक़े से अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना और फिर एक राष्ट्रीय सरकार के गठन की बात करना ठीक बात नहीं है.
"अगर हमें इस पर विचार करना है तो हमें एस सप्ताह पहले के हालात की तरफ़ मुड़ना चाहिए."