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'सरकार को नीतियों में सुधार करना होगा'

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ में 'यूनिट फ़ॉर फ़ैमिली स्टडीज़' की अध्यक्ष प्रोफ़ेसर शालिनी भरत का कहना है कि एड्स से बचाव की सरकार की नीति में लोगों को सहारा देने और उनका ध्यान रखने से जुड़े पहलू भी शामिल किए जाने चाहिए.

प्रोफ़ेसर भरत का कहना है कि बचाव की नीति ठीक तो है मगर और पहलुओं पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है.

उनके अनुसार, "सरकार एड्स से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू नहीं देख पा रही है मगर सरकार की नीतियों में महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है."

उन्होंने कहा कि सरकार अब भी कुछ ही वर्गों पर ध्यान दे रही है मगर सिर्फ़ यौनकर्मियों और ट्रक चालकों पर ही नहीं बल्कि दूसरे वर्गों पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है.

प्रोफ़ेसर भरत के अनुसार इन्हीं वर्गों पर ख़ास तौर पर ध्यान देने से इन वर्गों को समाज में और हाशिये पर ला खड़ा किया है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.

उनका ये भी कहना था कि लोगों में अभी एक समान जागरूकता नहीं है.

अब भी कुछ ही राज्यों पर ख़ास ध्यान दिया जा रहा है जबकि छोटी जगहों पर या निजी क्षेत्र के डॉक्टरों में अब भी इसकी पूरी स्वीकार्यता नहीं है.

प्रोफ़ेसर भरत का कहना है कि बचाव की नीति के साथ ही यदि लोगों को सहारा भी दिया गया तो लोगों में उम्मीद बँधेगी और उम्मीद से लोगों में एड्स पीड़ितों का तिरस्कार कम होगा.