श्रीलंका की शांति प्रक्रिया में मधयस्थता कर रहे देश नॉर्वे का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को श्रीलंका जाएगा.
नॉर्वे के अधिकारियों का कहना है कि श्रीलंका में राजनीतिक संघर्ष के बावजूद ये मध्यस्थ कोलंबो पहुँचेंगे.
श्रीलंका में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के बीच तमिल विद्रोहियों के साथ अपनाई जानेवाली नीति को लेकर मतभेद हैं.
नॉर्वे के दो मध्यस्थ श्रीलंका पहुँचकर शांति प्रक्रिया रूकने के बाद पहली बार विद्रोहियों और सरकार के बीच सीधी बातचीत करवाने की कोशिश करेंगे.
दोनों पक्षों के बीच मतभेदों के बाद इस साल के शुरूआत में ये शांति प्रक्रिया रूक गई थी.
संकट
तमिलों के साथ रूख़ को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के मतभेद ने श्रीलंका में बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है.
राष्ट्रपति ने इसे लेकर पिछले दिनों तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त कर दिया और संसद भी निलंबित कर दी.
ये सब तब हुआ जब प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे अमरीका दौरे पर गए हुए थे.
उन्होंने वापस आकर कुमारतुंगा पर शांति प्रक्रिया को नुक़सान पहुँचाने का आरोप लगाया और संसद को बहाल करने की माँग की.
श्रीलंका की राष्ट्रपति ने शुक्रवार को देश में राजनीतिक दलों के सामने मिली-जुली सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा था.
उन्होंने विक्रमसिंघे सरकार की ये कहते हुए आलोचना की कि उसके काम-काज से देश की सुरक्षा को ख़तरा पहुँच रहा था.