भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा है कि पिछले साल गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों के ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा ज़रूर मिलेगी.
उन्होंने यह बात लंदन से छपनेवाले 'फ़ायनान्शियल टाइम्स' अख़बार को दिए एक इंटरव्यू में कही.
वाजपेयी के इस बयान को गुजरात दंगों पर उनका सबसे कड़ा बयान माना जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि गुजरात में गोधरा में एक ट्रेन के डिब्बे में 58 हिंदू यात्रियों को ज़िंदा जला कर मार दिए जाने के बाद पूरे प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे.
उन दंगों में क़रीब 2000 मुसलमानों की हत्या कर दी गई थी.
वाजपेयी के इस बयान को भारत के उच्चतम न्यायालय के प्रति उनकी आस्था और समर्थन के रूप मे भी देखा जा रहा है.
सितंबर में न्यायालय ने कहा था कि "गुजरात में सत्तारुढ़ हिंदू राष्ट्रवादी सरकार पिछले साल के सांप्रदायिक दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने में रूचि नहीं ले रही है. अब तक किसी को भी सज़ा नहीं सुनाई गई है."
वाजपेयी ने फ़ायनेन्शियल टाइम्स से कहा, "इस बात में कोई संदेह नहीं कि उस हिंसा में जो लोग भी शामिल थे उन्हें सज़ा ज़रूर मिलनी चाहिए."
गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन पर लगातार आरोप लगते रहे कि उन्होंने दंगे रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए.
लेकिन वाजपेयी उन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटा पाने में सफल नहीं रहे.
इसके अलावा वाजपेयी की उस टिप्पणी पर भी काफ़ी आलोचना हुई कि "मुसलमान चाहे दुनिया में कहीं भी हों, दूसरे संप्रदाय के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करते रहते हैं"
कड़ा रुख
लगता है अब वाजपेयी अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत की छवि को लेकर कुछ अधिक सजग हो गए हैं.
उन्होंने 'फ़ायनान्शियल टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में ये भी कहा, "हमें इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि गुजरात की त्रासदी स्थानीय स्तर पर ही शुरु हो कर ख़त्म हो गई. भारत का धर्मनिरपेक्ष चरित्र बना हुआ है."
गुजरात दंगों के अलावा प्रधानमंत्री ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि पाकिस्तान सीमा पर आतंकवाद को ख़त्म करने की दिशा में कोई बहुत कारगर क़दम नहीं उठा रहा है.
बहरहाल, उन्होंने भारत की तरफ़ से ये आश्वासन दिया कि वे पाकिस्तान से संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें जारी रखेंगे.