श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि देश में राजनीतिक संकट के बावजूद संसद में बहुमत उनके ही पास है.
अमरीका की यात्रा पर गए विक्रमसिंघे ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मुलाक़ात के बाद कहा कि देश में तमिल टाइगर विद्रोहियों के साथ शांति लाने के लिए उनके पास जनादेश है.
उन्होंने राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा पर देश में अराजकता लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
विक्रमसिंघे की राष्ट्रपति बुश से मुलाक़ात के कुछ घंटे पहले ही कुमारतुंगा ने श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा कर दी थी.
राजनीति का हिस्सा
रनिल विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति बुश को बताया कि श्रीलंका में "स्थितियाँ बदल गई हैं" मगर यह "श्रीलंका की राजनीति का एक हिस्सा" है.
उन्होंने कहा,"पिछले पच्चीस बरसों से हमारे यहाँ ये उतार-चढ़ाव आता रहा है".
विक्रमसिंघे ने कहा कि उनकी अनुपस्थिति में राष्ट्रपति जान-बूझकर देश में अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि इस सप्ताह श्रीलंका वापस लौटते ही वे यह संकट समाप्त कर देंगे.
आपातकाल
कोलंबो से बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन का कहना है कि आपातकाल स्थानीय समय के अनुसार गुरूवार आधी रात से लागू कर दिया गया है.
उन्होंने बताया कि राजधानी कोलंबो में महत्वपूर्ण स्थानों के आस-पास पुलिस तैनात कर दी गई है.
उनका कहना है कि राष्ट्रपति के इस फ़ैसले को सरकार के विरूद्ध संवैधानिक विद्रोह के तौर पर देखा जा रहा है.
आपातकाल लागू होने के बाद बिना आरोप के गिरफ़्तारियाँ हो सकती हैं और सार्वजनिक बैठकों पर रोक लग सकती है.
साथ ही राष्ट्रपति का मीडिया पर भी नियंत्रण हो जाएगा.
युद्धविराम
श्रीलंका की राष्ट्रपति ने कहा है कि आपातकाल की घोषणा के बावजूद विद्रोहियों के साथ जारी शांतिवार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
श्रीलंका में राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार लक्ष्मण कदिरगमार ने भी कहा है कि सरकार का एलटीटीई के ख़िलाफ़ फिर से संघर्ष शुरू करने का कोई इरादा नहीं है.
राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा एलटीटीई के बारे में प्रधानमंत्री के रूख़ से असंतुष्ट बताई जाती थीं.
उधर समाचार एजेंसियों के अनुसार एलटीटीई ने कहा है कि वह स्थितियों पर नज़र रखे हुए है.
अमरीका ने भी कहा है कि वह शांति प्रक्रिया का समर्थन करता है और ये चाहता है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मिलकर काम करें.