श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा पर अमरीका सहित कई देशों ने चिंता जताई है.
अमरीका का कहना है कि इससे देश में गृहयुद्ध समाप्त करने की कोशिशों को धक्का पहुँच सकता है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने लगभग इस तरह की चिंता ज़ाहिर की है.
लेकिन भारत को उम्मीद है कि श्रीलंका में कोई संवैधानिक संकट खड़ा नहीं होगा.
ऐसी ही उम्मीद संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी ज़ाहिर की है.
मगर श्रीलंका सरकार और तमिल चरमपंथियों के बीच मध्यस्थता कर रहे नॉर्वे ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
'संसद से पुष्टि'
भारतीय विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि श्रीलंका का नेतृत्व बातचीत के ज़रिए अपने मतभेद सुलझा लेगा.
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस घटनाक्रम से कोई संवैधानिक संकट खड़ा नहीं होगा. हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष संविधान के दायरे में रहेंगे."
भारत-श्रीलंका रिश्तों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनो देशों के बीच बहुत सार्थक रिश्ता है और उन्हें नहीं लगता कि इससे इसपर कोई असर पड़ेगा.
श्रीलंका के मंत्रिमंडल के प्रवक्ता जी एल पेरेस ने कहा कि राजनीतिक संकट के बावजूद मध्यस्थता कर रहे नॉर्वे के प्रतिनिधियों से तमिल चरमपंथियों से बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है.
उनका कहना था कि पिछले दो दिनों की गतिविधियों के बावजूद संसद अब भी सरकार के नियंत्रण में है.
पेरेस ने कहा कि राष्ट्रपति को आपातकाल लागू करने का अधिकार तो है लेकिन संसद को 14 दिन के भीतर इसको मंज़ूरी देनी होगी.