अमरीका का कहना है कि श्रीलंका का राजनीतिक संकट देश में बीस साल से जारी गृहयुद्ध पर रोक लगाने के प्रयासों को पीछे धकेल सकता है.
विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे से शांति प्रक्रिया के लिए मिलजुल कर प्रयास करने का आग्रह किया.
वैसे राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने संसद को निलंबित करने और कई प्रमुख मंत्रियों को बर्ख़ास्त करने के अपने फ़ैसले को सही बताया है और कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उन्होंने ये क़दम उठाया है.
दूसरी ओर श्रीलंका के विदेश मंत्री टायरॉन फर्नांडो ने राष्ट्रपति कुमारतुंगा के क़दमों की आलोचना की है और कहा है कि उन्होंने देश की सुरक्षा स्थिति का गलत अनुमान लगाया है.
मंगलवार को राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त करके संसद को निलंबित कर दिया था जिससे राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है.
राष्ट्रपति ने रक्षा, सूचना और आंतरिक सुरक्षा मंत्रियों को बर्ख़ास्त कर दिया है.
राष्ट्रपति ने सेना को राजधानी कोलंबो में सरकारी टेलीविज़न के दफ़्तर सहित तमाम सरकारी इमारतों की चौकसी के आदेश दे दिए हैं.
उनका कहना था कि तमिल छापामारों से दो साल चली बातचीत ने हज़ारों लोगों की जान बची है.
यह बर्ख़ास्तगी ऐसे दिन आई है जब प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे तमिल विद्रोहियों के शांति प्रस्तावों के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से वाशिंगटन में चर्चा करने वाले थे.
विदेश मंत्री फर्नांडो भी उनके साथ अमरीका यात्रा पर हैं.
अमरीका से जारी बयान में प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने इसे ग़ैर ज़िम्मेदारीपूर्ण क़दम बताया और कहा कि यह जनादेश को पलटने की कोशिश है.
अमरीका की चिंता
अमरीका परदे के पीछे से श्रीलंका शांति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
इसी के तहत श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे इन दिनों अमरीका की यात्रा पर हैं.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फिलप इरेली ने कहा कि अमरीका राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों से शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का अनुरोध करता है.