श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त करके संसद को निलंबित कर दिया है जिससे राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है.
राष्ट्रपति ने रक्षा, सूचना और आंतरिक सुरक्षा मंत्रियों को बर्ख़ास्त कर दिया है.
राष्ट्रपति ने सेना को राजधानी कोलंबो में सरकारी टेलीविज़न के दफ़्तर सहित तमाम सरकारी इमारतों की चौकसी के आदेश दिए हैं.
यह बर्ख़ास्तगी ऐसे दिन आई है जब प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे तमिल विद्रोहियों के शांति प्रस्तावों के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से वाशिंगटन में चर्चा करने वाले थे.
अमरीका से जारी बयान में प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने इसे ग़ैर ज़िम्मेदारीपूर्ण क़दम बताया और कहा कि यह जनादेश को पलटने की कोशिश है.
विक्रमसिंघे ने श्रीलंका की जनता को संबोधित करते हुए कहा, "मैं आपसे वादा करता हूँ कि आपकी सरकार शांति प्रक्रिया और देश की आर्थिक ख़ुशहाली की दिशा में उठाए जा रहे क़दमों के ख़िलाफ़ इस हताशापूर्ण ग़ैर ज़िम्मेदार कार्रवाई को सफल नहीं होने देगी. "
उन्होंने कहा कि वे जनसमर्थन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से शांति, लोकतंत्र और देश की ख़ुशहाली की दिशा में काम करना जारी रखेंगे.
अमरीकी सरकार ने सोमवार को कहा था कि श्रीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों को पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतरिम प्रशासन के बारे में बातचीत शुरु करनी चाहिए.
लेकिन अमरीकी सरकार ने तमिल विद्रोहियों के प्रस्तावों के बारे में कुछ नहीं कहा था.
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं.
चंद्रिका कुमारतुंगा की फ्रीडम पार्टी ने तमिल विद्रोहियों के शांति पर गहरी चिंता जताई थी.
फ्रीडम पार्टी देश का मुख्य विपक्षी दल है और विद्रोहियों की माँगों को मानने के लिए अगर संविधान में संशोधन की ज़रूरत होती है तो विपक्ष का सहयोग ज़रूरी होगा.
राष्ट्रपति कार्यालय ने मंत्रियों की बर्ख़ास्तगी के बारे में कहा है कि देश में सुरक्षा की स्थिति में और गिरावट रोकने के लिए ऐसा किया गया है.
लेकिन अमरीका से जारी बयान में विक्रमसिंघे ने कहा कि राष्ट्रपति का यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वे देश से बाहर हैं.
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई जनता को उस आर्थिक ख़ुशहाली से वंचित करने के लिए है जो उनकी सरकार ने पिछले दो साल में किए हैं.
राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के साथ राजनीति संबंध अच्छे नहीं हैं.
रनिल विक्रमसिंघे की पार्टी ने दिसंबर 2001 के संसदीय चुनावों में चंद्रिका कुमारतुंगा की फ्रीडम पार्टी को हराकर सरकार बनाई थी.
राजधानी कोलंबो में मौजूद बीबीसी संवाददाता फ्रांसिस हैरिसन का कहना है कि मंत्रियों की बर्ख़ास्तगी से दोनों नेताओं के बीच संबंध सुधरने की उम्मीद ख़त्म हो गई है.
जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा शांति प्रक्रिया के बारे में ख़ासतौर से रक्षा मंत्री तिलक मरापुना, आंतरिक सुरक्षा मंत्री जॉन अमरतुंगा और सूचना मंत्री इम्तियाज़ बकीर मरकर से ख़ासतौर से नाराज़ थीं.