पाकिस्तान के एक नागरिक ने अमरीका और पाकिस्तान सरकार के ख़िलाफ़ एक करोड़ डॉलर के हर्जाने का मुक़दमा दायर किया है.
पाकिस्तान में अपनी तरह का ये पहला मुक़दमा है.
मोहम्मद सग़ीर को अमरीकी सेना ने पकड़कर अपने सैनिक अड्डे गुआंतानामो बे में क़ैद रखा था.
सग़ीर ने अब अपने मानसिक और शारीरिक नुक़सान की भरपाई के लिए मुक़दमा दायर किया है.
मोहम्मद सग़ीर एक मौलवी हैं और उन्हें 2001 में अफ़ग़ानिस्तान में सैनिक कार्रवाई के दौरान अमरीकी सैनिकों ने पकड़ लिया था.
फिर उन्हें अल क़ायदा और तालेबान के संदिग्ध सदस्यों के साथ गुआंतानामो बे में रखा गया जहाँ से उन्हें एक साल बाद छोड़ा गया.
मोहम्मद सग़ीर के मुक़दमे पर दिसंबर के तीसरे हफ़्ते में पाकिस्तान की अदालत में ही होगी.
बुरा बर्ताव
पाकिस्तान के सरहदी सूबे के शहर कोहाट के 51 वर्षीय मोहम्मद सग़ीर को उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में ग़िरफ़्तार किया गया था.
वे वहाँ धर्मप्रचार के लिए गए हुए थे जब अफ़ग़ान नेता जनरल रशीद दोस्तम ने उन्हें पकड़कर अमरीका के हवाले कर दिया.
मोहम्मद सग़ीर ने अपनी गिरफ़्तारी को ग़ैर-क़ानूनी बताते हुए गुआंतानामो बे में अपने साथ हुए बर्ताव को अमानवीय बताया.
उन्होंने कहा कि उन्हें एक साल तक ऐसी जेल में रखा गया जो जानवरों के पिंजड़े के समान थी.
उनका कहना था कि इस दौरान उनसे लगातार अल क़ायदा से उनके संबंध के बारे में पूछा गया.
सग़ीर ने कहा कि उनके इससे इनकार करने पर उन्हें ये कहते हुए सज़ा दी गई कि वे सहयोग नहीं कर रहे.