पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने चीन के दौरे के दौरान कश्मीर का उल्लेख किया.
चीन के हैनान प्रांत के बाओ शहर में अपने भाषण में पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि फ़लस्तीन और कश्मीर गहरी चिंतावाले मुद्दे हैं.
साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई की पाकिस्तान में होने जा रहे दक्षिण एशियाई देशों के सम्मेलन, सार्क में आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में मदद मिलेगी.
परवेज़ मुशरर्फ़ का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और कोरिया की समस्याएँ और साथ ही साथ फ़लस्तीन और कश्मीर गंभीर चिंता वाली समस्याएँ हैं.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की चीन के नए राष्ट्रपति हू जिंताओ से ये पहली मुलाक़ात है.
इस यात्रा की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जून में ही भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चीन की यात्रा पर गए थे और उसे काफ़ी महत्त्व दिया गया था.
महत्व
बीबीसी संवाददाता बार्नबी मेसन का कहना है कि वो दिन अब नहीं रहे जब पाकिस्तान चीन के साथ अपने रिश्तों को हल्के ढंग से लेता था क्योंकि भारत और चीन के रिश्ते खटास भरे थे.
मगर जून के अंत में वाजपेयी की चीन की छह दिवसीय यात्रा के बाद लगा कि समीकरण कुछ बदल रहे हैं और एशिया की दोनों महाशक्तियाँ नज़दीक़ आ रही हैं.
इसके बाद शायद पाकिस्तान की चिंता बढ़ हुई.
इस दौरान दोनों देशों के सैनिक सहयोग पर भी बातचीत हो रही है.
चीन अब भी पाकिस्तान को हथियार देने वाला सबसे बड़ा देश है और भारत की लगातार बढ़ती सैनिक शक्ति को देखते हुए उसके लिए ये संबंध महत्त्वपूर्ण भी है.
इस बीच चीन के नेताओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के नेताओं पर दबाव बनाया था कि वे अपने रिश्तों में लगातार बढ़ रहे तनाव कम करें.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन दोनों ही देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है जिससे वह इस क्षेत्र की महाशक्ति का अपना दर्जा और बढ़ा सके.