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तमिल विद्रोहियों ने प्रस्ताव सौंपा

श्रीलंका में सत्ता बँटवारे के मामले में तमिल विद्रोहियों ने अपना पहला प्रस्ताव सरकार के पास भेजा है.

दो दशक पुरानी समस्या को हल करने के लिए यह काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है हालाँकि अभी इस प्रस्ताव का विवरण जारी नहीं किया गया है.

बारह पेज के इस दस्तावेज़ को तैयार करने में कई महीने लगे हैं और नॉर्वे के मध्यस्थकारों का कहना है कि यह तमिल विद्रोहियों की राजनैतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए काफ़ी विस्तार से तैयार किया गया है.

राजधानी कोलंबो में मौजूद बीबीसी संवाददाता फ्राँसिस हैरिसन का कहना है कि इस दस्तावेज़ में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले क्षेत्र में एक अंतरिम प्रशासन की स्थापना का ख़ाका खींचा गया है.

सुझाव

सरकार ने अंतरिम प्रशासन की स्थापना के लिए बहुत से सुझाव दिए थे जिनमें से कुछ को विद्रोहियों ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया था कि उनमें पर्याप्त अधिकार देने की बात नहीं है.

तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई की राजनैतिक शाखा के प्रमुख एसपी तमिलशेलवन ने यह दस्तावेज़ नॉर्वे के राजदूत हांस ब्रेट्सकर सौंप दिया है जो उसे सरकार को देंगे.

अब विद्रोहियों ने कहा है कि सरकार के साथ जो बातचीत इस साल अप्रेल में टूट गई थी अब उसका फिर से शुरू होना इस पर निर्भर करेगा कि सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख़ अपनाती है.

सरकार ने उम्मीद जताई है कि विद्रोरियों ने इस प्रस्ताव में राजनैतिक रूप से संवेदनशील कोई माँग नहीं उठाई होगी और उन मुद्दों पर आपसी बातचीत में ही विचार किया जाएगा.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राजस्व, भूमि और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विवाद गहराने की संभावना है क्योंकि सरकार अभी इन मामलों का नियंत्रण विद्रोहियों को देने के लिए तैयार नहीं है.

शांति प्रक्रिया के आलोचकों यह भी कह सकते हैं कि सरकार को विद्रोहियों को कोई अधिकार तब तक नहीं सौंपने चाहिए जब तक कि वे अपने हथियार डालने के बारे में कोई ठोस वचन ना दें.