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समता पार्टी और जनता दल (यू) का विलय

भारत में वाजपेयी सरकार में शामिल दो पार्टियों - समता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) का विलय हो गया है.

नई पार्टी का नाम जनता दल (यू) ही रखा गया है और इसका निशान भी वही तीर रहेगा जो कि जनता दल(यू) का निशान था.

नई पार्टी का अध्यक्ष जॉर्ज फ़र्नांडिस को बनाया गया है जो समता पार्टी के अध्यक्ष थे.

जनता दल (यू) के अध्यक्ष शरद यादव को पार्टी के संसदीय बोर्ड का प्रमुख बनाया गया है.

नई पार्टी के नेता और रेलमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि लोकसभा में पार्टी के 18 सांसद अब अपने संसदीय नेता का चुनाव करेंगे.

पार्टी नेता जॉर्ज फ़र्नांडिस का कहना है कि जनता पार्टी से टूटकर अलग हुए कई दूसरे धड़ों को भी साथ मिलाने की कोशिश की जा रही है.

क्यों हुआ विलय

समता और जनता दल (यू) के हाथ मिलाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि ऐसा बिहार में लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल को टक्कर देने के इरादे से किया गया.

मगर पार्टी नेता जॉर्ज फ़र्नांडिस ने इससे इनकार किया है.

उन्होंने कहा,"दोनों पार्टियों की सरकार नगालैंड में है, गुजरात में है तो विचारधारा की ज़रूरत को देखते हुए यह फ़ैसला किया गया".

मगर टीकाकारों की राय में विलय का बिहार की राजनीति पर असर पड़ना स्वाभाविक है क्योंकि दोनों ही पार्टियों का बिहार में सबसे ज़्यादा प्रभाव है.

लेकिन लालू यादव ने इस विलय को अवसरवाद का नाम देते हुए कहा कि इससे उनकी पार्टी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा,"हम इसको खिलवाड़ मानते हैं, ये रंगा सियार की तरह जनता की आँख में धूल झोंकने की कोशिश है".

आरजेडी नेता लालू यादव ने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता दल(यू) का सफ़ाया हो जाएगा.