दिल्ली उच्च न्यायालय ने संसद पर हमले के मामले में बुधवार को दो लोगों को मौत की सज़ा बहाल रखी है जबकि दो अन्य को इस मामले से बरी कर दिया है.
दिल्ली विश्वविद्यालय के एक अध्यापक सैयद अब्दुल रहमान गीलानी और एक कथित कश्मीरी चरमपंथी शौक़त हुसैन की पत्नी नवजोत संधू उर्फ़ अफ़्शाँ गुरू को बरी कर दिया गया है.
जबकि इस मामले में दो अन्य लोगों मोहम्मद अफ़ज़ल और शौक़त हुसैन उर्फ़ गुरू की मौत की सज़ा बहाल रखी है.
अदालत का कहना है कि सैयद अब्दुल रहमान गीलानी और नवजोत संधू के ख़िलाफ़ सबूतों की कमी पाई गई.
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मोहम्मद अफ़ज़ल, शौक़त हुसैन और सैयद अब्दुल रहमान गीलानी को मौत की और अफ़्शाँ गुरू को पाँच साल की सज़ा सुनाई थी.
विशेष अदालत ने इन्हें संसद पर हुए हमले की साज़िश में शामिल होने और हमलावरों की मदद करने का दोषी पाया था.
आरोप
पुलिस का कहना है कि मोहम्मद अफ़ज़ल और शौक़त हुसैन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े रहे हैं.
13 दिसंबर, 2001 को हुए इस हमले में कुल 14 लोग मारे गए थे जिनमें पांच हमलावर भी शामिल थे.
इनमें से किसी पर भी पुलिस ने हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया था क्योंकि हमले में शामिल पांचों लोग उसी दिन मारे गए थे.
पुलिस ने इन लोगों पर हमले की साज़िश में शामिल होने और हमलावरों की मदद का आरोप लगाया था.
मोहम्मद अफ़ज़ल और उसके चचेरे भाई शौक़त के ख़िलाफ़ आरोप था कि उन्होंने संसद पर हमले के लिए जा रहे चरमपंथियों को हथियार, गोलाबारूद और दूसरी ज़रूरी चीज़ें मुहैया कराईं.
इन दोनों को श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया था.
शौकत की पत्नी अफ़शाँ गुरू पर इन्हें पनाह देने और इस साज़िश के बारे में पुलिस को जानकारी न देने का आरोप लगाया गया था.