श्रीलंका में लापता हो गए लोगों के बारे में जाँच करनेवाली एक सरकारी कमेटी ने कहा है कि देश की पुलिस और सेना में तमिलों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है.
श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग की यह जाँच कमेटी देश के उत्तर में स्थित जाफ़ना शहर से लापता हो गए लगभग 300 लोगों के बारे में जाँच कर रही थी.
इन लोगों में से ज़्यादातर लोग तमिल थे जिन्हें कथित तौर पर सेना ने हिरासत में ले लिया था.
इस रिपोर्ट को श्रीलंका में लंबे समय से चल रहे जातीय संघर्ष के दौरान वहाँ मानवाधिकारों की स्थिति के लिए एक बड़ा धक्का माना जा रहा है.
असहयोग
कमेटी ने जाँच के दौरान सैनिक अधिकारियों से सहयोग ना मिलने की शिकायत की है.
उसने कहा है कि उन्हें कई ऐसे अधिकारियों से मिलने नहीं दिया गया जिनकी गवाहियाँ महत्वपूर्ण हो सकती थीं.
जाँच के दौरान केवल दो अफ़सरों से बात की जा सकी मगर रिपोर्ट में कहा गया है कि उन दोनों को कुछ भी याद नहीं था जबकि इन मामलों से वे लोग सीधे-सीधे जुड़े थे.
साथ ही रिपोर्ट में पुलिस के काम-काज पर ऊँगलियाँ उठाते हुए कहा गया है कि उन्होंने मामलों को छिपाने में मदद की.
विद्रोही भी दोषी
कमेटी ने कई लोगों के ग़ायब होने के लिए तमिल विद्रोहियों को भी ज़िम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने 25 मुसलमानों के ग़ायब होने की घटना की जाँच की और कहा कि तमिल टाइगरों ने इन लोगों के बारे में उन्हें जानकारी देने से मना कर दिया.
जाँच कमेटी ने कहा कि कुल मिलाकर उनका काम बड़ा दुखदायी और निराशाजनक था.