नेपाल के पश्चिमी हिस्से में मंगलवार को माओवादी विद्रोहियों के हमले में नौ लोग मारे गए हैं.
सुरक्षा अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि 50 से अधिक विद्रोहियों ने राजधानी काठमांडू से लगभग 200 किलोमीटर पश्चिम में सुसुवा में एक पुलिस चौकी पर हमला किया.
अधिकारियों के अनुसार इस हमे में छह पुलिसकर्मी, एक सैनिक और दो नागरिक मारे गए.
संवाददाताओं का कहना है कि नेपाल के पश्चिमी हिस्से में पिछले तीन दिन में हुई ये तीसरी ऐसी घटना है.
माओवादियों की माँग है कि देश से राजतंत्र ख़त्म कर दिया जाना चाहिए और उसकी जगह गणतंत्र की स्थापना हो.
इसके लिए उन्होंने अगस्त में संघर्षविराम ख़त्म करते हुए हमले तेज़ कर दिए हैं.
देश में लगभग आठ साल से चल रहे इस संघर्ष के दौर में 8,000 लोग मारे गए हैं.
प्रेस भी निशाने पर
इस बीच पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संगठन 'रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स' ने कहा है कि नेपाल की सरकार को देश में पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा रोकने के लिए क़दम उठाने चाहिए.
संगठन के महासचिव रॉबर्ट मेनार्ड ने प्रधानमंत्री सूर्य बहादुर थापा को लिखे पत्र में कहा है, "हम विद्रोहियों और सरकार दोनों ओर से पत्रकारों पर हो रहे हमलों को लेकर काफ़ी चिंतित हैं क्योंकि इससे ख़बरों को रोकने की कोशिश हो रही है."
चिट्ठी में कहा गया है, "युद्ध जैसी परिस्थितियों में पत्रकारों को 1949 की चौथी जेनेवा संधि के तहत संरक्षण दिया जाता है."
इस संगठन का कहना है कि नेपाल में इस समय नौ पत्रकार या तो हिरासत में हैं या फिर लापता बताए जा रहे हैं.