भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नागालैंड में मोबाइल टेलीफ़ोन सेवा शुरू कर दी है.
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड की तीन दिन की यात्रा सोमवार को शुरु की है और किसी प्रधानमंत्री का छह साल में यह पहला नागालैंड दौरा है.
कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री वाजपेयी अपने इस दौरे में चरमपंथ की समस्या से निबटने के प्रयासों को भी प्रोत्साहित करेंगे.
सोमवार को उन्होंने राज्य की पहली मोबाइल फ़ोन सेवा का उद्घाटन किया जिसे सरकारी कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड मुहैया करा रही है.
संभावना है कि प्रधानमंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान राज्य के विकास के लिए किसी बड़ी योजना की भी घोषणा कर सकते हैं.
भारत सरकार ने कुछ महीने पहले भी राज्य के विकास के लिए तीन अरब 65 करोड़ रूपए के पैकेज की घोषणा की थी.
प्रधानमंत्री के साथ गए संचार मंत्री अरूण शौरी ने इस मौक़े पर कहा कि शुरु में राजधानी कोहिमा में 500 कनेक्शन दिए जाएंगे और बाक़ी शहरों में नवंबर-दिसंबर तक सेवाएं बढ़ाई जाएंगी.
शौरी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष ख़त्म होने से पहले यानी मार्च 2004 तक नागालैंड के सभी ज़िलों को मोबाइल फ़ोन सेवा से जोड़ दिया जाएगा.
सरकार और नगा विद्रोही गुट नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड के बीच चल रही बातचीत के बारे में शौरी ने कहा, "हमें बातचीत जारी रखनी चाहिए और फ़ासलों को कम करना चाहिए."
नगा वार्ता
भारतीय प्रधानमंत्री के इस दौरे से एक महीने पहले भारत सरकार के मध्यस्थों ने नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में नगा विद्रोही संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड(आइएम) के नेताओं से बात की थी.
एनएससीएन(आइएम) ने 1997 में भारत सरकार के साथ संघर्षविराम पर समझौता किया था जिसे कई बार बढ़ाया जा चुका है.
इस दौरान नगा नेताओं के साथ भारत सरकार की कई दौर की बात हुई है.
इनके बाद ही नगा नेता इसाक चिसी स्वू और थ्येंगलांग मुईवा इस साल जनवरी में 36 साल बाद बातचीत के लिए सरकारी तौर पर भारत आए.
ये दोनों नेता एम्सटर्डम से ही अपने नगा-आँदोलन का नेतृत्व सँभाल रहे हैं.
नगा नेताओं के साथ बातचीत में ग्रेटर नगालैंड के मुद्दे पर सबसे ज़्यादा मतभेद रहा है जिसके तहत नगा नेता नगालैंड के तीन पड़ोसी राज्यों के नगा बहुल इलाक़ों को नागालैंड में शामिल करना चाहते हैं.
मगर पिछले महीने नागालैंड को अधिक अधिकार देने जैसे कम संवेदनशील मुद्दों पर बात हुई.